आई.बी. कॉलेज में ‘अस्तित्ववाद’ विषय पर स्लोगन लेखन प्रतियोगिता का आयोजन
BOL PANIPAT । स्थानीय आई.बी. कॉलेज के अंग्रेजी विभाग द्वारा बी.ए. (ऑनर्स) प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए एक कक्षा गतिविधि के रूप में ‘स्लोगन लेखन प्रतियोगिता’ का सफल आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता का मुख्य विषय ‘अस्तित्ववाद’ रखा गया था, जिसमें विद्यार्थियों ने बड़े उत्साह के साथ अपनी रचनात्मकता और वैचारिक क्षमता का प्रदर्शन किया।
यह आयोजन महाविद्यालय के यशस्वी प्राचार्य डॉ. सतवीर सिंह के कुशल मार्गदर्शन एवं अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. नीलम की देखरेख में संपन्न हुआ। गतिविधि का सफल संचालन गतिविधि प्रभारी एकता चौधरी द्वारा किया गया।
प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने स्लोगन के माध्यम से मनुष्य की स्वतंत्रता, व्यक्तिगत उत्तरदायित्व और जीवन की सार्थकता जैसे जटिल दार्शनिक पहलुओं को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
प्राचार्य डॉ. सतवीर सिंह ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी गतिविधियाँ छात्रों के बौद्धिक विकास के लिए अनिवार्य हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. नीलम ने बताया कि ‘अस्तित्ववाद’ जैसे गहन विषय को चुनने का उद्देश्य विद्यार्थियों में दार्शनिक समझ विकसित करना और उन्हें साहित्य के विविध आयामों से परिचित कराना है। गतिविधि प्रभारी सुश्री एकता चौधरी ने विद्यार्थियों के उत्साहवर्धन हेतु उनकी सराहना की ।
प्राचार्य डॉ. सतवीर सिंह ने अपने संदेश में कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में तर्कशक्ति और स्वतंत्र चिंतन विकसित करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं युवाओं को समाज और स्वयं के प्रति अधिक जागरूक बनाती हैं। उन्होंने अंग्रेजी विभाग की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे नवाचारी प्रयासों से कॉलेज का शैक्षणिक वातावरण और अधिक सुदृढ़ होता है।
विभागाध्यक्ष डॉ. नीलम ने इस गतिविधि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि साहित्य और दर्शन एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि ‘अस्तित्ववाद’ हमें यह सिखाता है कि हम अपने जीवन के स्वयं निर्माता हैं; इसलिए विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं को पहचानकर समाज में एक सकारात्मक पहचान बनानी चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी हर्ष जताया कि प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों ने इतने कठिन विषय को न केवल समझा, बल्कि उसे कलात्मक रूप से व्यक्त भी किया।
अंग्रेजी विभाग का यह प्रयास न केवल शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि इसने विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति कौशल को भी नई दिशा प्रदान की।

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