स्वदेशी से स्वावलंबन—उद्यमिता से आत्मनिर्भर भारत’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित
विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा, ज्ञान और कौशल का उपयोग करते हुए रोजगार मांगने वाले के
स्थान पर रोजगार के अवसर उत्पन्न करने वाला बनना चाहिए: प्राचार्य प्रो. (डॉ.) जगदीश गुप्ता
BOL PANIPAT – बुधवार,सितंबर,2026 : आर्य पी.जी. कॉलेज, पानीपत की उद्यमिता एवं नवाचार प्रकोष्ठ द्वारा ‘स्वदेशी से स्वावलंबन—उद्यमिता से आत्मनिर्भर भारत’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में स्वदेशी जागरण मंच के प्रांत संगठन कुलदीप मुख्य वक्ता एवं विषय-विशेषज्ञ रहे। उनके साथ स्वदेशी जागरण मंच के जिला संयोजक विजेंद्र, जिला संपर्क प्रमुख अवनीश तथा पूर्णकालिक कार्यकर्ता अजय भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
महाविद्यालय पहुंचने पर प्राचार्य प्रो. (डॉ.) जगदीश गुप्ता, उप-प्राचार्य डॉ. अनुराधा सिंह एवं प्रो. पंकज चौधरी ने अतिथियों को पौधे भेंट कर उनका आत्मीय स्वागत किया। प्राचार्य प्रो. (डॉ.) जगदीश गुप्ता ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वदेशी केवल एक विचार नहीं, बल्कि भारत को आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने का प्रभावशाली माध्यम है। विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा, ज्ञान और कौशल का उपयोग करते हुए रोजगार मांगने वाले के स्थान पर रोजगार के अवसर उत्पन्न करने वाला बनना चाहिए। स्वदेशी उत्पादों के प्रयोग से स्थानीय उद्योगों और उद्यमियों को प्रोत्साहन मिलने के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होती है।
उप-प्राचार्य डॉ. अनुराधा सिंह ने कहा कि युवाओं की रचनात्मकता, ऊर्जा और उद्यमशील सोच आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला है। उन्होंने विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच के साथ नवाचार अपनाने, अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
मुख्य वक्ता कुलदीप ने स्वदेशी, स्वावलंबन और उद्यमिता के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने से देश का धन देश में ही रहता है, स्थानीय कारीगरों एवं उद्यमियों को प्रोत्साहन मिलता है तथा रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होते हैं। युवाओं को नवीन विचारों को व्यावसायिक अवसरों में परिवर्तित करके आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देना चाहिए।उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन और उद्यमिता में सफलता के लिए पांच महत्त्वपूर्ण सूत्र दिए—शीघ्र शुरुआत करें, सीखते हुए कमाएं, बड़ा सोचो, परंपरागत सीमाओं से आगे सोचें, राष्ट्र प्रथम- स्वदेशी अनिवार्य।
कार्यक्रम के संयोजक प्रो. पंकज चौधरी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि उद्यमिता केवल व्यवसाय आरंभ करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समस्याओं के अभिनव समाधान खोजने, चुनौतियों को अवसरों में बदलने तथा समाज के लिए रोजगार एवं मूल्य सृजित करने की कला है। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने तथा स्थानीय उद्यमियों को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। कार्यक्रम का प्रभावशाली मंच संचालन भी प्रो. पंकज चौधरी ने किया।
जिला संपर्क प्रमुख अवनीश ने विद्यार्थियों से मोबाइल फ़ोन के अत्यधिक प्रयोग से दूर रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा अपने बहुमूल्य समय का उपयोग अध्ययन, कौशल-विकास तथा रचनात्मक गतिविधियों में करें। मोबाइल की अनावश्यक लत से मुक्त होकर और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करके ही विद्यार्थी जीवन में कुछ बड़ा हासिल कर सकते हैं। इस अवसर पर आस्था गुप्ता, बलकार सिंह, डॉ. विजय सिंह, श्वेता शर्मा, गरिमा मल्होत्रा तथा सुनील कुमार सहित महाविद्यालय के प्राध्यापक गण उपस्थित रहे। संगोष्ठी में 155 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और स्वदेशी उत्पादों को अपनाने तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, प्राध्यापकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

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