आर्य कॉलेज में‘हिंदी पखवाड़े’ के अंतर्गत वाद-विवाद प्रतियोगिता का हुआ सफल आयोजन
BOL PANIPAT , गुरुवार 10 सितंबर 2026 : आर्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय के हिंदी विभाग के उपक्रम हिन्दी साहित्य परिषद द्वारा आयोजित आगामी हिंदी दिवस के शुभावसर पर 1 सितंबर से 14 सितंबर के मध्य हिंदी पखवाड़ा के रूप में अंत:महाविद्यालय स्तर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से परिषद का उद्देश्य हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में योगदान देना एवं विद्यार्थियों में साहित्यिक और रचनात्मक स्तर को समृद्ध करना है। गुरुवार को हिंदी पखवाड़े के आयोजन में वाद-विवाद प्रतियोगिता, स्लोगन-लेखन प्रतियोगिता, पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता आयोजित हुई। इन प्रतियोगिताओं में विभिन्न संकायों के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर अपनी भूमिका निभाई।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो.(डॉ.) जगदीश गुप्ता ने विद्यार्थियों को अपने प्रेरणादायक विचारों से संबोधित करते हुए कहा कि आगामी हिंदी दिवस के उपलक्ष्य पर हिंदी पखवाड़ा मनाया जा रहा है जिसके अंतर्गत विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित करवाई गई हैं। हर्ष का विषय है कि महाविद्यालय के सभी संकायों से विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर अपनी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा हमारी पहचान और संस्कृति है। ए.आई. के वर्तमान समय में विद्यार्थियों को हिंदी भाषा के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता है। हिंदी भाषा विश्व स्तर पर निरंतर विकसित हो रही है। वाद-विवाद प्रतियोगिता का विषय ‘ए.आई.और तकनीक के दौर में हिंदी भाषा का भविष्य सुरक्षित है। विद्यार्थियों ने पक्ष और विपक्ष पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
बी.जे.एम.सी द्वितीय वर्ष की छात्रा अंजलि ने विषय के पक्ष में अपने विचार रखते हुए बताया कि भारत की लगभग 40 प्रतिशत आबादी ए.आई. और तकनीक के समय में भी हिंदी भाषा का प्रयोग कर रही है और साथ ही लगभग 60 करोड़ लोग दैनिक जीवन में हिंदी भाषा का प्रयोग करते हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तकनीक के क्षेत्र में हिंदी विश्व स्तर पर अपना प्रचार-प्रसार निरंतर बढ़ा रही है। एम.ए. द्वितीय वर्ष की छात्रा खुशबू ने विषय के पक्ष में अपने विचार रखते हुए कहा कि आज हिंदी भाषा तकनीकी के दौर में रोज़गार को लेकर भी सशक्त हुई है। डिजिटल क्षेत्र में, साहित्यिक क्षेत्र में हिंदी भाषा का प्रयोग बढ़ रहा हैं। वहीं बी.ए.द्वितीय वर्ष की छात्रा भावना ने विषय के विपक्ष पर अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि ए.आई. के दौर में हिंदी भाषा का भविष्य सुरक्षित नहीं है, अगर हिंदी भाषा को तकनीकी के क्षेत्र में समृद्ध करना है तो भाषा की शुद्धता, देवनागरी लिपि, तकनीकी निर्भरता पर विशेष ध्यान देना होगा। अन्यथा हिंदी भाषा एक मशीनी भाषा बन कर रह जाएगी।
स्लोगन-लेखन प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार पर स्लोगन प्रस्तुत किए। पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता भी हिंदी भाषा पर आधारित रही। विद्यार्थियों ने हिंदी भाषा के विभिन्न क्षेत्रों में हिंदी भाषा का विस्तार और समृद्धि का वर्णन चित्रों व रंगों के माध्यम से प्रस्तुत किया।
महाविद्यालय की उपाचार्या डॉ. अनुराधा सिंह ने प्रतियोगिता के सभी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदी विभाग हिंदी दिवस के उपलक्ष्य पर हिंदी पखवाड़ा के माध्यम से छात्र- छात्राओं के रचनात्मक कौशल के विकास के साथ-साथ और हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में योगदान दे रहा है। ए.आई. के समय में भी हिंदी भाषा का विस्तार तीव्र गति से बढ़ता जा रहा है। उन्होंने विजेता प्रतिभागियों को बधाई दी।
हिंदी साहित्य परिषद के संयोजक विजय सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि ए.आई. और तकनीकी के दौर में हिंदी भाषा का भविष्य उज्ज्वल है, लेकिन देवनागरी लिपि की सुरक्षा, सांस्कृतिक संदर्भ और हिंदी भाषा की मूल आत्मा को सहेजने का कार्य हम भारतवासियों पर ही निर्भर है। उन्होंने अपने संबोधन में आगे बताया कि विजेता विद्यार्थियों को हिंदी दिवस पर प्रमाण पत्र एवं ट्रॉफी प्रदान कर पुरस्कृत किया जायेगा।
कार्यक्रम में मंच संचालन की भूमिका बी.जे.एम.सी. द्वितीय वर्ष की छात्रा अंजलि ने निभाई।
इस प्रतियोगिता में इतिहास विभाग से डॉ. विजय सिंह और हिंदी विभाग से डॉ. शालिनी, कविता मलिक, गोपाल मलिक सहित अन्य सदस्यगण उपस्थित रहे।

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