पुलिस कर्मी पर गाड़ी चढ़ाने और सरकारी कार्य में बाधा डालने के मामले में नाबालिक को 6 महीने प्रोबेशन पीरियड़ पर छोड़ा गया
BOL PANIPAT : 12 मई। ज्वुनाईल जस्टिस बोर्ड ने 2020 के एक मामले में पुलिस कर्मी पर गाड़ी चढ़ाने और सरकारी कार्य में बाधा डालने को लेकर हुए मामले में नाबालिक को उसे इस अपराध का एहसास करवातेे हुए 6 महीने के प्रोबेशन पीरियड़ पर छोडऩे के आदेश जारी किए हैं। इस मामले में उक्त नाबालिक को एक साल 27 दिन की कस्टडी भी दी जा चुकी है। यह मामला मॉडल टाऊन थाने से सम्बंधित था। इस मामले में एक एसपीओ का भी देहांत हो गया था। उक्त दोनों आरोपियों ने जोकि गाड़ी में आ रहे थे उन्हें पुलिस ने चैकिंग के लिए रोका तो उन्होंने पुलिस कर्मी पर ही गाड़ी चढ़ा दी थी और पुलिस कर्मी बोनट पर आ गया था उसके बाद भी इन्होंने गाड़ी को नहीं रोका और इन्होंने एक रिक्शा चालक को भी टक्कर मारी जिससे उसको भी काफी चोटे आई थी।
ज्वुनाईल जस्टिस बोर्ड के प्रिंसीपल जज पुनित लिम्बा ने बताया कि इस मामले में ड्राईवर जोकि एक व्यस्क है उसकी कोर्ट ट्रायल पहले से ही चली हुई है लेकिन साथ में बैठे नाबालिक पर उसका साथ देने और सरकारी कार्य में बाधा डालने का केस दर्ज किया गया था जिसमें नाबालिक को 6 महीने प्रोबेशन पीरियड़ पर छोड़ा गया है।
इस केस में अपने फैसले में हवाला देते हुए ज्वुनाईल जस्टिस बोर्ड के प्रिंसीपल जज पुनित लिम्बा द्वारा लिखा गया है कि कोई व्यक्ति जब किसी पुलिस अधिकारी को अपने वाहन के नीचे कुचलकर ऐसा भयानक कार्य कर सकता है तो जस्टिस बोर्ड ऐसे कार्यो की भयावहता से अनभिज्ञ नही रह सकता और ऐसे कार्य केवल समाज पर ही नहीं बल्कि अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने वाले प्रत्येक ईमानदार पुलिस अधिकारी पर भी प्रभाव डालते हैं। ऐसा कार्य मानवीय अंतरआत्मा सामाजिक व्यवस्था और कानूनी नींव के साथ-साथ इसकी रक्षा करने वालों के मनोबल पर भी प्रहार करता है। ऐसा प्रतीत होता है कि ऐसे लोगों को कानून का कोई भय नहीं है। उन्होंने ऐसा कार्य किया है जिस कारण दूसरे की मृत्यु हुई है और चोटें आई हैं।

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