Thursday, May 14, 2026
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गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती के अवसर पर एक विचार गोष्ठी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।


BOL PANIPAT : निर्मला देशपांडे संस्थान में माता सीता रानी सेवा संस्था द्वारा गांधीगंज के आह्वान पर गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती के अवसर पर एक विचार गोष्ठी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गुरुदेव टैगोर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।

संस्था की महासचिव पूजा सैनी ने कहा कि गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविख्यात साहित्यकार, चिंतक और मानवतावादी थे, जिन्होंने भारत और भारतीय संस्कृति के संदेश को विश्वभर में पहुँचाया। उन्होंने विशेष रूप से चीन, यूरोप और अमेरिका की यात्राओं के माध्यम से भारतीय दर्शन एवं संस्कृति का प्रचार किया। वे साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रथम भारतीय थे।

उन्होंने कहा कि गुरुदेव टैगोर ने ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को पहली बार “महात्मा” कहकर संबोधित किया था। यद्यपि अंग्रेज सरकार ने उन्हें ‘सर’ की उपाधि से सम्मानित किया था, किन्तु जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में उन्होंने यह उपाधि लौटा कर ब्रिटिश शासन के प्रति अपना विरोध प्रकट किया।

उन्होंने आगे कहा कि टैगोर ने शिक्षा के क्षेत्र में अभिनव प्रयोग करते हुए विश्व भारती शांति निकेतन की स्थापना की, जहाँ विद्यार्थियों को प्रकृति के सान्निध्य में वैकल्पिक एवं मानवीय शिक्षा प्रदान की जाती है। यह संस्थान आज भी विश्वभर में शिक्षा की नई दिशा का प्रतीक माना जाता है।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि गुरुदेव टैगोर की रचनाओं को भारत, बांग्लादेश तथा श्रीलंका ने अपने राष्ट्रीय गीतों के रूप में स्वीकार किया है। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगान का गायन भी किया।

कार्यक्रम में प्रसिद्ध एडवोकेट एवं सामाजिक कार्यकर्ता राममोहन राय, इरशाद अली, मुस्तकीम चौधरी, मधु यादव, सुजाता चौधरी, सोनिया गर्ग, श्रुति जैन, सोनी यादव तथा ज्योति रानी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

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