”समाजवादी क्रांति की प्रासंगिकता” विषय पर गोष्ठी आयोजित की गई
BOL PANIPAT : 7 नवम्बर आज स्थानीय भगत सिंह स्मारक में दुनिया की पहली समाजवादी क्रांति दिवस के अवसर पर ” समाजवादी क्रांति की प्रासंगिकता ” विषय पर एक गोष्ठी आयोजित की गई। अध्यक्षता सीपीआई के राज्य सचिव कामरेड दरियाव सिंह कश्यप ने की और संचालन सी पी आई के जिला सचिव पवन कुमार सैनी एडवोकेट ने किया।
सीपीआई के राज्य सचिव दरियाव सिंह कश्यप ने 1917 में रुस की मेहनतकश जनता द्वारा की गई क्रांति के इतिहास पर चर्चा करते हुए कहा कि रुसी क्रांति का दुनिया भर में गुलामी से आजादी के आंदोलन पर सकारात्मक प्रभाव पडा़। मजदूरों -किसानों की क्रांति ने न केवल रुस के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की बल्कि दुनिया भर के आजाद हुए देशों के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि रुसी क्रांति का हमारे देश की आजादी के आंदोलन में प्रशंसनीय योगदान रहा और स्वतंत्रता प्राप्ती के बाद हमारे देश के विकास के लिए सोवियत संघ द्वारा दिये गए योगदान को भुलाया नही जा सकता।
सीपीआई की राज्य कार्यकारिणी के सदस्य कामरेड राम रतन एडवोकेट ने कहा कि महान समाजवादी क्रांति ने तत्कालीन रुस में मानव द्वारा मानव के शोषण पर रोक लगाई और एक ऐसे युग की शुरुआत की जिसमें प्रत्येक आदमी अपना मालिक खुद बन गया। उन्होंने कहा कि दुनिया में जब तक आदमी के द्वारा आदमी के शोषण की व्यवस्था रहेगी तब तक सोवियत क्रांति की प्रासंगिकता रहेगी। आज पूंजीपतियों द्वारा शोषण की नीति के विरोध में चल रहे सभी वर्गों के आंदोलन की सफलता के लिए आगे बढ कर काम करने का संकल्प दोहराने का दिन है।
संचालन करते हुए सीपीआई के जिला सचिव कामरेड पवन कुमार सैनी ऐडवोकेट ने कहा कि क्रांति के बाद रुस के साथ लगते विभिन्न राज्यों ने स्वेच्छापूर्वक रुस के साथ मिलकर सोवियत संघ का गठन किया। उन्होंने कहा कि कुछ ही समय बाद सोवियत संघ में अशिक्षा, महंगाई , बेरोजगारी, सामाजिक असानता का खात्मा कर दिया गया।
गोष्ठी में जुबेर राणा , जय भगवान दरियापुर,कृष्ण लाल लौहारी, कैलाश यादव , हरपाल सिंह कश्यप, जुबेद राणा, भूपेन्द्र कश्यप,शीश राम तोमर, सतीश यादव, ओम प्रकाश कश्यप आदि उपस्थित रहे।

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