Friday, April 17, 2026
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 नगर निगम पानीपत द्वारा चलाये गये स्वच्छता पखवाडे का समापन समारोह

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at October 2, 2024 Tags: , , , ,

– युवा एवं खेल मंत्रालय भारत सरकार से प्रायोजित एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की एनएसएस इकाई द्वारा स्वच्छता पखवाड़ा एवं कार्यशाला का सारगर्भित समापन

BOL PANIPAT , 02 अक्टूबर. एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में नगर निगम द्वारा चलाये गए 15 दिवसीय स्वच्छता पखवाड़े का समापन समारोह आयोजित किया गया जिसके जेबीएम पर्यावरण प्रबंधन पानीपत और एसडी पीजी कॉलेज के स्वयंसेवकों और सफाईमित्रो के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया । प्रशिक्षण कार्यशाला का विषय ‘ठोस और तरल कचरे का प्रबंधन’ रहा । समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि डॉ वीरेंद्र कुमार दहिया आईएएस उपायुक्त पानीपत ने शिरकत की । अतिविशिष्ट उपस्थिति में डॉ जैयेंद्र सिंह छिल्लर आईएएस म्युनिसिपल कमिश्नर पानीपत उपस्थित रहे । विशिष्ट मेहमानों में मणि त्यागी एचसीएस जॉइंट कमिश्नर एमसी पानीपत, अरुण भार्गव डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर पानीपत, मुकेश कुमार सचिव म्युनिसिपल समिति समालखा, राजेश पाण्डेय सीओओ जेबीएम और जितेन्द्र नरवाल सीएसआई म्युनिसिपल कारपोरेशन पानीपत ने कार्यक्रम में भाग लिया । मेहमानों का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, प्रोग्राम ऑफिसर एवं स्वच्छता एम्बेसडर डॉ राकेश गर्ग और डॉ संतोष कुमारी ने पुष्प-रोपित गमले भेंट करके किया । कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई । इस अवसर पर राजकीय आदर्श संस्कृति स्कूल पानीपत से प्रवीण, आर्य बाल भारती पब्लिक स्कूल से बलजीत, बाल विकास स्कूल से नैंसी, डॉ एमकेके आर्य मॉडल स्कूल से नवीन अपने छात्र-छात्राओं को लेकर प्रदर्शनी में जिन्होनें स्वच्छता विषय पर प्रदर्शनी लगाकर लोगों को जागरूक किया । राजकीय आदर्श संस्कृति स्कूल पानीपत ने प्रदुषण के विषय पर एक लघु नाटिका भी प्रस्तुत की । इस अवसर पर उपायुक्त पानीपत और डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर पानीपत ने डॉ राकेश गर्ग, डॉ संतोष कुमारी और सफाईमित्रों जेबीएम से विनय, मोहित, हैप्पी, नरेंद्र, अतुल रमन,अशोक कुमार, नवीन कुमार, परविंदर, पवन नरवाल, गोविन्द एवं गुलाब सिंह, आईएनडी सोल्यूशन से सीमा, वीरमति, संदीप एवं धरमवीर और पीसीसी सेनिटेशन से रेखा, सरिता, मंजीत, एवं विक्की आदि को उनके उल्लेखनीय और पानीपत शहर को साफ़ रखने हेतु किये गए कार्यों के लिए सम्मानित किया । स्वच्छता चैंपियन का सम्मान एमसी समालखा अमित, रणबीर, राजबाला और सुमन को मिला । सीवर मैन रवि, दीपक और किशन के कार्य को भी भरपूर सराहना मिली । तुषार सिंह रावल जो अब तक 100 पेड़ लगा चुके है को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया ।

     कार्यक्रम में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी और भूतपूर्व प्रधानमन्त्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन किया गया । विदित रहे कि कॉलेज एनएसएस द्वारा यह स्वच्छता पखवाड़ा 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक केंद्र सरकार के निर्देशानुसार मनाया गया जिसका थीम ‘स्वभाव स्वच्छता, संस्कार स्वच्छता’ रहा । एनएसएस स्वयंसेवकों ने खुद की पहल पर अपने राष्ट्रीय कर्तव्य बोध का परिचय दिया और सम्पूर्ण पखवाड़े में आमजन को स्वच्छता के प्रति उनकी जिम्मेदारियों के बारें में जागरूक किया ।       

        डॉ वीरेंद्र कुमार दहिया उपायुक्त पानीपत ने कहा कि नागरिक स्वच्छता की ओर इतने जागरूक हो कि ऐसे स्वच्छता पखवाड़ो की जरुरत ही न पड़े । उन्होनें चुनाव के मद्देनज़र सभी मतदाताओं से अपील की कि राष्ट्र हित में सभी मतदाता मतदान अवश्य करें । जल, स्वच्छता और साफ-सफाई सीधे तौर पर मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव डालते हैं और इन्हें नजरअंदाज करने पर इसके दूरगामी परिणाम होते हैं । भारत सबसे तेजी से विकसित होने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है लेकिन जब जल, स्वच्छता और साफ-सफाई संकेतकों की बात आती है तो स्थिति चिंताजनक है । 1.4 अरब से अधिक की आबादी वाले देश में स्वच्छता पर ध्यान देने की तत्काल आवश्यकता हो चली है । ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के प्रमुख घटकों में से एक है जिसे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और जीवन की सामान्य गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है ।

       जैयेंद्र सिंह छिल्लर आईएएस म्युनिसिपल कमिश्नर पानीपत ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस कचरे के उदाहरणों में रसोई, उद्यान, पशु-शेड, कृषि और धातु, कागज, प्लास्टिक, कपड़ा आदि जैसी सामग्री से निकलने वाले अपशिष्ट शामिल हैं । ये वो जैविक और अकार्बनिक सामग्रियां हैं जिनका घरों, वाणिज्यिक और औद्योगिक प्रतिष्ठानों द्वारा उत्पादित मालिकों के लिए कोई आर्थिक मूल्य नहीं है । ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश घरेलू कचरा जैविक होता है जिसमें थोड़ी अकार्बनिक सामग्री होती है और यह गैर विषैला होता है । अपनी पर्यावरण-अनुकूलता के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में खाद बनाना अपशिष्ट प्रबंधन का एक अत्यधिक उपयुक्त तरीका है । दूसरी तरफ, जब पानी एक बार उपयोग किया जाता है और यह मानव उपभोग या किसी अन्य उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं रहता है तो इसे तरल अपशिष्ट माना जाता है । परन्तु इस अपशिष्ट जल को औद्योगिक और घरेलू के रूप में उपवर्गीकृत किया जा सकता है । औद्योगिक अपशिष्ट जल विनिर्माण प्रक्रियाओं द्वारा उत्पन्न होता है और इसका उपचार करना कठिन होता है । घरेलू अपशिष्ट जल में घरों, वाणिज्यिक परिसरों, होटलों और शैक्षणिक संस्थानों से निकलने वाला पानी शामिल है ।

            अरुण भार्गव डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर ने कहा कि कचरे के निष्पादन के मुद्दे से निपटने का समाधान अब सेवा वितरण और तकनीकी मॉडल की खोज करना है जो की क्रियाशील, व्यावहारिक, सामाजिक रूप से स्वीकार्य, संस्थागत रूप से संगत और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य होने चाहिए । संसाधन पुनर्प्राप्ति के लिए मूल्य श्रृंखला पुनर्चक्रण पर विचार करना भी अत्यंत आवश्यक है और इस प्रकार हमें एक परिपत्र अर्थव्यवस्था में सुचारू रूप से सुनिश्चित करना होगा । 

            राजेश पाण्डेय सीओओ जेबीएम ने कहा कि स्वच्छता शारीरिक और आध्यात्मिक दोनों ही दृष्टि से मानव जीवन का एक बहुत ही आवश्यक घटक है । आध्यात्मिक स्वच्छता का अर्थ है अपने धर्म की मान्यताओं और रीति-रिवाजों का पालन करना । दूसरी ओर भौतिक स्वच्छता मानवता के कल्याण और अस्तित्व के लिए आवश्यक है । स्वस्थ और खुशहाल जीवन जीना बहुत ज़रूरी है । असल में स्वास्थ्य और स्वच्छता एक दूसरे से जुड़े हुए हैं । अच्छा स्वास्थ्य पाने के लिए स्वच्छता का अभ्यास करना ज़रूरी है । अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखना और बीमारियों से बचना इंसान के लिए बहुत ज़रूरी है ।

            अजीत तिवारी मैनेजर जेबीएम ने कहा कि गीला कचरे में जैविक चीज़ें आती हैं जैसे कि खाने-पीने का सामान, गंदे खाद्य रैपर, स्वच्छता उत्पाद, टिशू और कागज़ के तौलिये । गीले कचरे को खाद में बदला जा सकता है और इसे हमेशा हरे कूड़ेदान में डालना चाहिए । सूखा कचरे में बोतलें, डिब्बे, कपड़े, प्लास्टिक, लकड़ी, कांच, धातु और कागज़ जैसी चीज़ें आती हैं । सूखा कचरा पुनर्चक्रणीय होता है इसलिए इसे नीले कूड़ेदान में डालना चाहिए । गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने से इनका निपटान आसान होता है वर्ना इनको अलग-अलग करना मुश्किल हो जाता है । सूखे कचरे को बेचकर पैसे भी मिलते हैं जबकि गीले कचरे से खाद बनाया जा सकता है । कचरे को अलग-अलग करने के लिए हम अलग-अलग डिब्बे या कंटेनर का इस्तेमाल कर सकते है ।

     डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि ठोस कचरे के अनुचित प्रबंधन और निपटान का मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ भौतिक पर्यावरण पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है । संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत की जनसंख्या 2024 में 1.4 अरब से बढ़कर 2050 में 1.6 अरब हो जाएगी । जैसे-जैसे अधिक से अधिक लोग शहरी क्षेत्रों में पलायन करना शुरू करेंगे उपभोग के तरीके बदलेंगे और बदले में कचरे के प्रवाह में तेजी से वृद्धि होने की उम्मीद है । इतनी बड़ी आबादी के साथ कचरे का प्रबंधन न केवल सौंदर्य और पर्यावरण संबंधी एक समस्या होगा बल्कि इससे उत्पन्न होने वाली और समस्याओं का कारण भी बनेगा ।

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