Friday, April 17, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस (बायो-डाईवर्सिटी डे) पर दो दिवसीय कार्यक्रम का पहला दिन

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at May 21, 2022 Tags: , , , ,

जैव-विविधता व पर्यावरण के अनुरूप आर्थिक एवं सामजिक विकास आज के समय की सबसे बड़ीमांग: प्रो सरनाम सिंह, डीन नालंदा विश्वविधालय रायपुर  

BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज में अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस के अवसर आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम का आज पहला दिन रहा. प्रथम दिन डॉ सरनाम सिंह प्रोफ़ेसर एवं डीन नालंदा विश्वविधालय रायपुर (बिहार) ने ओन-लाइन और ऑफ लाइन दोनों माध्यमों से अपने वेब व्याख्यान मेंकॉलेज के बीएससी एवं एमएससी विद्यार्थियों का ज्ञानवर्धन और मार्गदर्शन किया. उन्होनें छात्र-छात्राओं से अपने अनुभव बांटते हुए कहा की विश्व के समृद्धतम जैव विविधता वाले 17 देशों में भारत भी सम्मिलित हैजिसमे विश्व की लगभग 70 प्रतिशत जैव विविधता विद्यमान है. अन्य 16 देश ऑस्ट्रेलिया, कांगो, मेडागास्कर, दक्षिण अफ़्रीका, चीन, इंडोनेशिया, मलेशिया, पापुआ न्यू गिनी, फिलीपींस, ब्राज़ील, कोलम्बिया, इक्वेडोर, मेक्सिको, पेरू, अमेरिका और वेनेजुएला है. संपूर्ण विश्व का केवल 2.4 प्रतिशत भाग ही भारत में हैलेकिन यहां विश्व के ज्ञात जीव-जंतुओं का लगभग 5 प्रतिशत भाग निवास करता है. उन्होनें कॉलेज द्वारा इस सर्वाधिक प्रासंगिक विषय पर सेमीनार को आयोजित करने को एक सराहनीय और सकारात्मक प्रयास बताया.माननीय वक्ता का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, वनस्पति शास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ रवि कुमार, प्राणी शास्त्र की विभागाध्य्क्षा डॉ प्रियंका चांदना, डॉ राहुल जैन ने किया. विदित रहे की वर्ष 2022 की जैव विविधता का थीम ‘सभी के लिए साझे भविष्य का निर्माण’ है. प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने जैव विविधता को संजोने की दिशा में सभी छात्र-छात्राओं को गाय बचाने और उसके चारे का प्रबंध करने की शपथ भी दिलाई.

डॉ सरनाम सिंह जो वर्तमान में प्रोफ़ेसर एवं डीन नालंदा विश्वविधालय रायपुर (बिहार) में कार्यरत है उन्हें जैव विविधता के क्षेत्र में व्यापक अनुभव और ज्ञान हासिल है. वे इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ रिमोट सेंसिंग इसरो देहरादून के पूर्व-डीन (अकादमिक) के पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुके है. वे संयुक्त राष्ट्र संघ से जुडी संस्था सेंटर फॉर स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी एजुकेशन इन एशिया एंड द पेसिफिक के पूर्व निदेशक भी रह चुके है. उन्हें इंडियन सोसाइटी ऑफ़ रिमोट सेंसिंग ने 2015 में नेशनल जिओस्पेसिअल अवार्ड से नवाजा है.  

प्रो सरनाम सिंह डीन नालंदा विश्वविधालय रायपुरने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस प्रतिवर्ष 22 मई को मनाया जाता है और इसे विश्व जैव-विविधता संरक्षण दिवसभी कहते हैं. हमारे जीवन में जैव-विविधता का काफी महत्व है और इसीलिए संयुक्त राष्ट्र संघ ने इसको मनाना प्रारम्भ किया था. आज हमें एक ऐसे पर्यावरण की जरुरत है जो जैव-विविधता में समृद्ध, टिकाऊ और आर्थिक गतिविधियों के सर्वाधिक अनुकूल हो. जैव-विविधता में उपेक्षा या कमी होने से ही प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़, सूखा और तूफान आदि आने का खतरा बना रहता है. वर्तमान में हमारे लिए जैव-विविधता का संरक्षण बहुत जरूरी है. लाखों विशिष्ट जैविक की कई प्रजातियों के रूप में पृथ्वी पर जीवन उपस्थित है और हमारा जीवन प्रकृति का सर्वोत्तम उपहार है. अत: पेड़-पौधे, अनेक प्रकार के जीव-जंतु, मिट्टी, हवा, पानी, महासागर, पठार, समुद्र, नदियां इत्यादि, इन सभी प्रकृति की देन का हमें संरक्षण करना चाहिएक्योंकि यही हमारे अस्तित्व एवं विकास के लिए जरुरी है और यही सन्देश 22 मई का दिन हमें देता है. प्राकृतिक एवं पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में जैव-विविधता का महत्व देखते हुए ही जैव-विविधता दिवस को अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया था और कॉलेज ने भी इस सुअवसर को हाथ से जाने नहीं दिया है और इस कार्यक्रम को आयोजितकरकेअपने सार्भौमिक एवं मानवता वपर्यावरण प्रेम को अभिव्यक्त करने के दायित्व का निर्वाह किया है.

डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा की नैरोबी में 29 दिसंबर 1992 को हुए जैव-विविधता सम्मेलन में जैव-विविधता दिवस को 29 मई को मनाने का निर्णय लिया गया था. परन्तु कई देशों द्वारा व्यावहारिक कठिनाइयां जाहिर करने के पश्चात इसे 29 मई की बजाय 22 मई को मनाने का निर्णय लिया गया. इसमें विशेष तौर पर वनों की सुरक्षा, संस्कृति, जीवन के कला शिल्प, संगीत, वस्त्र-भोजन, औषधीय पौधों के महत्व आदि को प्रदर्शित करके जैव-विविधता के महत्व एवं उसके न होने पर व्याप्त खतरों के बारे में जागरूक किया जाता है. आज जीवन में जैव विविधता का काफी महत्व है. हमें एक ऐसे पर्यावरण का निर्माण करना हैजो जैव विविधता में समृद्ध, टिकाऊ और आर्थिक गतिविधियों के लिए अवसर प्रदान कर सके. जैव विविधता की कमी होने से प्राकृतिक आपदाये आने लगती है. अत: हमारे लिए जैव विविधता का संरक्षण बहुत जरूरी हो चला है. यदि जैव विविधता ही न रहेगी तो इन्सान का भी विलुप्त होना तय है.

      इस अवसर पर डॉ एसके वर्मा, डॉ राकेश गर्ग, प्रो मयंक अरोड़ा, दीपक मित्तल भी मौजूद रहे.  

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