किसानों की डिजिटल पहचान से सरकारी योजनाओं का लाभ होगा आसान और पारदर्शी : उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ
एग्री स्टैक पर किसान आईडी बनवाना जरूरी, 24 अगस्त को मुख्यमंत्री लेंगे जिलेवार प्रगति की जानकारी
एग्रीस्टैक पंजीकरण में तेजी लाने के निर्देश, कृषि भूमि व फसल का डिजिटल रिकॉर्ड होगा तैयार
ज़िले में लक्ष्य पूरा करने को युद्धस्तर पर अभियान, लापरवाही पर मांगा जाएगा जवाब
BOL PANIPAT , 23 अगस्त। उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने जिले के किसानों से अपील की है कि वे एग्रीस्टैक के तहत अपनी किसान आईडी (फार्मर आईडी) अवश्य बनवाएं। किसान आईडी किसानों की डिजिटल पहचान होगी, जिसके माध्यम से उनकी कृषि भूमि और फसल संबंधी जानकारी को डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा। इससे केंद्र व प्रदेश सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं, अनुदान, फसल बीमा, कृषि ऋण तथा किसान हितैषी सेवाओं का लाभ पात्र किसानों तक अधिक सुविधाजनक और पारदर्शी तरीके से पहुंचाने में मदद मिलेगी।
उपायुक्त ने कहा कि एग्रीस्टैक केवल किसानों का पंजीकरण करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह कृषि क्षेत्र को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल है। किसान आईडी बनने के बाद किसान की भूमि संबंधी जानकारी डिजिटल रूप से उपलब्ध होगी। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ देने की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाया जा सकेगा।
उपायुक्त ने कहा कि किसान आईडी बनवाने से किसानों को वर्तमान में मिल रहे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, पेंशन, बीमा तथा अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। पात्र किसानों को योजनाओं का लाभ पहले की तरह मिलता रहेगा। इसलिए किसानों को किसी प्रकार की भ्रांति या आशंका रखने की आवश्यकता नहीं है।
उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि एग्रीस्टैक पर किसानों के पंजीकरण के कार्य में तेजी लाई जाए और गांव-गांव किसानों को इसकी जानकारी देकर उन्हें पंजीकरण के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने कहा कि राजस्व एवं कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी निर्धारित लक्ष्य के अनुसार कार्य करते हुए पंजीकरण अभियान को गंभीरता से पूरा करें।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एग्रीस्टैक, डिजिटल क्रॉप सर्वे और ऑटो म्यूटेशन की प्रगति की मुख्यमंत्री 24 अगस्त को इन कार्यों की जिलेवार प्रगति की जानकारी स्वयं लेंगे।
गौरतलब है कि
मुख्यमंत्री ने गत दिवस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से धीमी प्रगति वाले जिलों से जवाब भी मांगा था और अधिकारियों को युद्धस्तर पर कार्य पूरा करने के निर्देश भी दिए थे।
उपायुक्त डॉ हरीश कुमार वशिष्ठ ने बताया कि एग्रीस्टैक के माध्यम से प्रत्येक पंजीकृत किसान को विशिष्ट किसान आईडी प्रदान की जाएगी और उसकी कृषि भूमि को डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा। इससे भविष्य में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा, कृषि ऋण, न्यूनतम समर्थन मूल्य आधारित खरीद, खाद-बीज वितरण सहित विभिन्न योजनाओं और सेवाओं का लाभ पहुंचाने में सुविधा होगी।
उपायुक्त डॉ. वशिष्ठ ने किसानों से आग्रह किया कि वे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपना पंजीकरण करवाकर किसान आईडी प्राप्त करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को पंजीकरण प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी न हो और उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध करवाई जाए।
उपायुक्त ने कहा कि डिजिटल कृषि व्यवस्था को मजबूत करने से किसानों को सरकारी सेवाओं के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम होगी तथा कृषि संबंधी सेवाओं की पहुंच और पारदर्शिता दोनों बढ़ेंगी।

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