घर के बुजुर्ग मंदिर की मूर्तियों के समान.उनकी छत्रछाया में सेफ रहोगे- बीके सुनीता
BOL PANIPAT : 17 अप्रैल, ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा सत्यम पैलेस में आयोजित घर बनें मंदिर विषय पर चल रहे कार्यक्रम के तीसरे और अंतिम दिन को शुक्रिया दिवस के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता राजयोगिनी बीके सुनीता बहन ने विषय पर बोलते हुए कहा कि जिन्होंने हमें जन्म दिया, पालना की वह मात-पिता हमारे लिए मंदिर की मूर्तियों के समान हैं
घर के बुजुर्ग भले हमारा कोई स्थूल कार्य तो नही कर सकते परन्तु उनके आशीर्वाद का हाथ जब तक हमारे सिर पर रहता है तब तक हमारा जीवन निर्विघ्न रहता है। उनकी छत्रछाया में ही हम खुश रह सकते हैं। इसलिए सदा उनके शुक्रगुजार रहो और कभी उनसे अलग होने का ख्याल भी मन मे ना आने दो. आगे ब्रह्माकुमारी बहन ने कहा कि घर परिवार में अक्सर समस्याओं का कारण एक ही होता है, सही समय पर सही निर्णय न लेना। जब तक व्यक्ति मोहग्रस्त है तब तक यथार्थ निर्णय ले ही नही सकता। इसलिये घर मे रहते ट्रस्टी होकर रहो, मोहवश होकर नही

जिंदगी में घाटा हो या फायदा सब ईश्वर को समर्पित करते चलो तो जीवन मे कभी मायूसी नही आएगी। आप सिर्फ श्रेष्ठ कर्म करते रहिए तो एक दिन सफलता मिल ही जाएगी क्योंकि अच्छे कर्म का फल आज नही तो कल जरूर मिलता है. अच्छे संस्कार या अच्छा परिवार भी सच्चा धन होता है। जिसके पास यह दोनों हैं वह गरीब नही अपितु संसार मे सबसे धनी है
कार्यक्रम के अंतिम चरण में बीके बहन ने कहा, यह तीन काम कभी नही करने
1- शिकायत नही करो
2- इच्छा नही रखो
3- अपने को दीनहीन नही समझो
हमेशा समझो मैं ईश्वर की संतान हूँ और परमात्मा शिव सर्वशक्तिमान है. जीवन में अस्त व्यस्त नही लेकिन मस्त व्यस्त बनो

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