लुप्त होती लोक कलाओं को मिलेगा नया जीवन: उपायुक्त डॉ. विरेंदर कुमार दहिया
गुरुओं और शिष्यों को मिलेगी छात्रवृत्ति
पारंपरिक विद्याओं के संरक्षण और लोक संस्कृति बचाने की दिशा में बड़ा कदम
कलाकारों को हर माह मिलेगी आर्थिक सहायता
विभाग ने मांगे आवेदन
आवदेक की आयु 50 वर्ष से कम होनी चाहिए
BOL PANIPAT , 7 मई। लुप्त होती पारंपरिक कलाओं और सांस्कृतिक विद्याओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। उपायुक्त डॉ. विरेंदर कुमार दहिया ने जिले के कलाकारों, गुरुओं और शिष्यों से इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया है।
उपायुक्त डॉ. विरेंदर कुमार दहिया ने बताया कि सरकार की ओर से पारंपरिक एवं विलुप्त होती कला विधाओं को संरक्षित करने के उद्देश्य से विशेष छात्रवृत्ति योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत उन गुरुओं, संगीतकारों और शिष्यों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी जो पारंपरिक कलाओं का प्रशिक्षण दे रहे हैं अथवा सीख रहे हैं।
विभाग ने इसको लेकर आवेदन मांगे है।
उपायुक्त डॉ. दहिया ने कहा कि जिले में ऐसी अनेक लोक कलाएं और पारंपरिक विद्याएं हैं जो धीरे-धीरे समाप्त होने की कगार पर हैं। इन कलाओं को संरक्षित करना हमारी सांस्कृतिक विरासत को बचाने के समान है। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि ऐसे गुरुओं और शिष्यों की सूची शीघ्र तैयार कर कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग को भेजी जाए ताकि पात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ मिल सके।
उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना के प्रति अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। कलाकारों तक जानकारी पहुंचाई जाएगी ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति इस योजना से वंचित न रहे। उपायुक्त ने जिले के लोक कलाकारों, संगीत गुरुओं एवं पारंपरिक कला से जुड़े लोगों से अपील की कि वे आगे आकर अपनी कला का पंजीकरण करवाएं और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोडऩे में योगदान दें।
जिला सूचना एवं लोक संपर्क अधिकारी डॉ. सुनील बसताडा ने बताया कि योजना के अंतर्गत गुरु को 7,500 रुपए प्रतिमाह, प्रत्येक संगीतकार को 3,750 रुपए प्रतिमाह तथा प्रत्येक शिष्य को 1,500 रुपए प्रतिमाह छात्रवृत्ति के रूप में प्रदान किए जाएंगे।
पात्रता मापदंड:
आवेदक की आयु 50 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए। संबंधित कला क्षेत्र में कम से कम 20 वर्षों का अनुभव आवश्यक है। आवेदक को बायोडाटा और नवीनतम छायाचित्र सहित आवेदन करना होगा। कला क्षेत्र से संबंधित प्रमाण पत्रों की स्वयं प्रमाणित प्रतियां संलग्न करनी होंगी। सरकारी या मान्यता प्राप्त संस्थानों से प्राप्त पुरस्कार/सम्मान के प्रमाण पत्र लगाने होंगे। प्रशिक्षण व्यवस्था के अनुसार एक गुरु के साथ चार शिष्य रखे जाएंगे। लोक नृत्य विधा में अधिकतम आठ शिष्य हो सकते हैं तथा आवश्यकता अनुसार एक या दो संगीततकार भी रखे जा सकते हैं।

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