हेलमेट दुर्घटना में हमारी जान बचाता है तो फिर इसे पहनने में नखरा क्यूँ : अब्दुल गफ्फार, सब-इंस्पेक्टर ट्रैफिक पुलिस पानीपत
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र सात दिवसीय विशेष एनएसएस कैंप का तीसरा दिन
एनएसएस स्वयंसेवकों ने लोगों को पढ़ाया सड़क सुरक्षा का पाठ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जाकर ग्रामीणों को दिए अच्छे स्वास्थ्य के टिप्स
BOL PANIPAT , 03 मार्च. एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र के एनएसएस पाठ्यक्रम के अनुसार 1 से 7 मार्च तक चलने वाले सात दिवसीय विशेष एनएसएस कैंप तीसरे दिन का थीम ‘सड़क सुरक्षा और स्वास्थ्य’ रहा. प्रात: कालीन सत्र में सभी एनएसएस कार्यकर्ताओं को योग और आध्यात्म का प्रशिक्षण दिया गया. तत्पश्चात कॉलेज प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा के मार्गदर्शन और एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर एवं वाईआरसी अधिकारी डॉ राकेश गर्ग, डॉ संतोष कुमारी, डॉ पवन कुमार और डॉ दीपिका मदान अरोड़ा की अगुआई में एनएसएस स्वयंसेवकों ने ग्राम काबड़ी जाकर वहां लोगो को हेलमेट पहनने के फायदे बताये और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया. गाँव में सड़क सुरक्षा पर रैली भी निकाली गई. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र काबड़ी जाकर स्वयंसेवकों ने ग्रामीणों को अच्छी सेहत, खून में कमी को कैसे दूर करें जैसे विषयों पर जागरूक किया और उनकी समस्याओं को सुना और उनके हल बताये. दोपहर बाद के सत्र में ऋषि टंडन एनजीओ कार्यकर्ता ने अपना वक्तव्य हेलमेट सुरक्षा पर दिया. तत्पश्चात ट्रेफ़िक पुलिस पानीपत से एसआई अब्दुल गफ्फार, एसआई राम निवास और पूर्व एसआई बचन सिंह ने एनएसएस स्वयंसेवकों को सड़क सुरक्षा के बारे में विस्तार से समझाया. एडीसी कार्यालय पानीपत से सेवानिवृत प्रोजेक्ट ऑफिसर अधिवक्ता अजय पंवार ने ‘नशा एक सामाजिक बुराई’ विषय पर अपना व्याख्यान दिया और युवाओं को नशे से दूर रहने का आह्वान किया. ऋषि टंडन एनजीओ कार्यकर्ता ने कहा कि इंसान की थोड़ी सी चूक उसके पूरे परिवार के लिए घातक बन सकती है. हेलमेट इतना भी महंगा नहीं है कि जिसे कोई बाइक सवार खरीद ही न सके. हेलमेट पहनने से 90 फीसदी लोगों की जान बचने की पूरी उम्मीद रहती है. बिना हेलमेट के सिर पर जरा सी भी चोट जानलेवा हो सकती है. उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि अपने परिजनों को बाइक पर घर से निकलते समय हेलमेट अनिवार्य रूप से लगाने को कहें और इसे अपने जीवन में भी आत्मसात करें. सड़क हादसों में सबसे अधिक दुर्घटनाएं दो पहिया वाहनों से होती हैं. कुछ लोग हेलमेट लगाने के कानून को मजबूरी मानते है. हमें इस सोच में बदलाव लाने की जरूरत है. हेलमेट को कानूनी मजबूरी न समझ कर जीवन रक्षक समझना चाहिए. अगर हमारा सिर सुरक्षित बच गया तो अन्य चोटों पर इलाज के बाद जीवन बच जाता है. एसआई अब्दुल गफ्फार ने कहा कि वर्तमान में सड़क सुरक्षा अत्यंत महत्त्वपूर्ण है. भारत में सड़क दुर्घटनाओं में हर साल 1.5 लाख से अधिक लोग मारे जाते हैं और 5 लाख से अधिक लोग घायल हो जाते है.

यद्यपि भारत ने सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों को कम करने और सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये प्रभावशाली लक्ष्य निर्धारित किये हैं फिर जब तक समाज में खुद जागरूकता नहीं आएगी तब तक स्थिति में सुधार होने वाला नहीं है. उन्होनें सड़क सुरक्षा से जुड़े सुझाव देते हुए कहा कि वाहन चालक को सड़क पर गाड़ी चलाते समय गति का ध्यान रखना चाहिये. अधिक व्यस्त सड़कों और रोड जंक्शन पर चलते समय हमें ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए. दोपहिया वाहन चालकों को अच्छी गुणवत्ता वाले हेलमेट पहनने चाहिये और बिना हेलमेट सड़क पर नहीं आना चाहिये. स्कूल, हॉस्पिटल, कॉलोनी आदि क्षेत्रों में गति का विशेष ध्यान रखना चाहिए. सभी वाहनों को दूसरे वाहनों से निश्चित दूरी बनाकर रखनी चाहिये. सड़कों पर चलने वाले सभी लोगों को सड़क पर बने निशान और नियमों की अच्छे से जानकारी होनी चाहिए. यात्रा के दौरान सड़क सुरक्षा के नियमों को हमेशा दिमाग में रखना चाहिए. अधिवक्ता अजय पंवार ने कहा कि नशा कैसा भी हो यह हमेशा बुरा ही होता है. बर्बादी का दूसरा नाम नशा है इसलिए जरूरी है कि इंसान नशे से दूर रहे. अगर किसी को नशे की लत लग ही जाए तो भी चंगुल से आजाद होना बेशक मुश्किल हो परन्तु नामुमकिन नहीं है. जब भी किसी नशा करने वाले व्यक्ति को नशे की तलब लगे तो उसे खुद पर काबू रखना चाहिए. किसी न किसी बहाने से उसे खुद को दो मिनट के लिए दूसरे कामों में लग जाना चाहिए इससे धीरे-धीरे नशे की तलब कम हो जाएगी. प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि इस कैंप का उद्देश्य एनएसएस विद्यार्थियों में सामाजिक दायित्व और सामाजिकता की भावना का विकास करना है. सरकार द्वारा जो सामाजिक कार्य और योजनायें बनाई जाती है उनको आम नागरिकों तक पहुंचाने का एक जिम्मा एनएसएस स्वयंसेवकों का भी है. आम लोगों के प्रति सहयोग करने की भावना का विकास एनएसएस करता है. इस अवसर पर डॉ एसके वर्मा, प्रो पवन कुमार, डॉ दीपिका अरोड़ा मदान, दीपक मित्तल आदि मौजूद रहे.

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