पराली जलाने की बजाय खेत में ही करें प्रबंधन
कृषि विभाग और केवीके का संयुक्त प्रशिक्षण शिविर आयोजित
BOL PANIPAT , 7 अक्तूबर। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग तथा चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को आजादी के अमृत महोत्सव को समर्पित कार्यक्रमों की श्रंखला में कृषि विज्ञान केंद्र उझा में फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत एक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. बलवान सिंह मंडल ने कहा कि किसानों को पराली जलाने की बजाय खेत में ही उसका प्रबंधन करना चाहिए ताकि भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़े। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से खेत की मिट्टी में मौजूद मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं, जिसके दुष्परिणाम किसान को भुगतने पड़ते हैं। वहीं पराली के धुएं से पर्यावरण भी प्रदूषित होता है। उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि वे पराली जलाने से बचें।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग पानीपत के उप निदेशक डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। जिले में पराली जलाने की घटनाएं नहीं हो रही हैं। कृषि विज्ञान केंद्र उझा के वरिष्ठ संयोजक डॉ. राजबीर गर्ग ने किसानों को धान की सीधी बिजाई के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि धान की सीधी बिजाई से जहां लागत कम आती है, वहीं समय की भी बचत होती है। इस अवसर पर प्रधान वैज्ञानिक डॉ. लवनीत शुक्ला, वैज्ञानिक डॉ. कुलदीप सिंह, डॉ. सतपाल सिंह, सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी डॉ. राजेश भारद्वाज व उपमंडल कृषि अधिकारी अनिल नरवाल ने भी किसानों को पराली न जलाने और फसल अवशेषों का खेत में ही प्रबंधन करने के लिए प्रेरित किया।

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