प्रेम का लगाना कोई बड़ी बात नहीं परन्तु बड़ी बात है उसको निभाना।
हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ श्री प्रेम मन्दिर पानीपत का 103 वां वार्षिक प्रेम सम्मेलन
BOL PANIPAT , 13 फरवरी: श्री प्रेम मन्दिर पानीपत का 103 वां वार्षिक प्रेम सम्मेलन परम पूज्य श्री श्री 1008 श्री मदन मोहन जी हरमिलापी जी महाराज परमाध्यक्ष श्री हरमिलाप मिशन हरिद्वार की अध्यक्षता में एवं श्री प्रेम मन्दिर पानीपत की परमाध्यक्षा परम पूज्या श्री श्री 108 श्री कान्ता देवी जी महाराज के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार से प्रारंभ होकर आज हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। प्रातः गुरूदेव जी ने मन्दिर की देवियों एवं उपस्थित भक्त मण्डली के साथ हवन किया। रामचरितमानस के अखण्ड पाठ का विश्राम किया। सत्संग में सन्तों ने अपने प्रवचनों में समझाया कि प्रेम का लगाना कोई बड़ी बात नहीं परन्तु बड़ी बात है उसको निभाना। गुरू द्वारा सिखाए मार्ग पर चलने से ही कल्याण हो सकता है। वैद्य से केवल औषधि लेने से बीमारी ठीक नहीं होगी। बीमारी औषधी के सेवन से ठीेक होगी। श्री राम व रावण दोनों ही शक्तिवान थे परन्तु श्रीराम ने उसका उपयोग जन कल्याण के लिए किया। जबकि रावण ने उस शक्ति का दुरूपयोग किया। सभी कामनाओं का परित्याग करना चाहिए। जीवन में स्वच्छता एवं पवित्रता दोनों होते हैं। जैसे बिजली की तारें दिखाई देती हैं। जबकि उसमें बहने वाला करन्ट दिखाई नहीं देता। किसी से बात पूछने के लिए बहुत सोचसमझ कर प्रश्न करना चाहिए। हर बात की मर्यादा होती है। क्योंकि किससे कब क्या पूछना चाहिए इस पर विचारवान होना आवश्यक है। सभी सन्तों ने उत्सव की निर्विघ्न समापन होने पर सबको शुभाशीष व बधाई दी।
श्री प्रेम मन्दिर की परमाध्यक्षा जी ने गुरूदेव प्रथम से गुरूदेव चतुर्थ के द्वारा किये गय तप सेव सिमरन को स्मरण किया एवं सभी कार्य आज भी उनकी अदृश्य शक्ति द्वारा सम्पन्न हो रहे हैं। हम सब केवल निमित्तमात्र हैं। सम्मेलन के समापन पर सभी सन्तों का आभार प्रकट किया।
श्री प्रेम मन्दिर (लैय्या) ट्रस्ट द्वारा शहर के प्रशासन नगर निगम एवं मीडिया द्वारा प्रदान किए गए सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

Comments