एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की एनसीसी यूनिट ने ‘मिशन लाइफ: लाइफ स्टाइल फॉर एनवायरमेंट’के अवसर पर किया विभिन्न गतिविधियों का आयोजन
पर्यावरण को बचाने का अर्थ अपनी चेतना को जागृत करना है: डॉ अनुपम अरोड़ा
12 हरियाणा एनसीसी बटालियन सोनीपत से सम्बद्ध है कॉलेज एनसीसी यूनिट
BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की एनसीसी यूनिट के कैडेट्स ने ‘मिशन लाइफ: लाइफ स्टाइल फॉर एनवायरमेंट’ के अवसर पर 12 हरियाणा एनसीसी बटालियन सोनीपत के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल अनील यादव के मार्गदर्शन में और प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, उप प्राचार्य डॉ नवीन गोयल और एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट बलजिंदर सिंह की अगुआई में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया. उनके साथ प्रो राकेश सिंगला, प्रो पवन सिंगला, डॉ रवि कुमार, डॉ राहुल जैन और डॉ एसके वर्मा भी उपस्थित रहे. सभी ने न सिर्फ खुद के घरों के बगीचे एवं बालकनी में फूल एवं पौधे और आस-पड़ोस में वृक्ष आरोपित करने की शपथ ली बल्कि समाज को भी पर्यावरण जागरूकता एवं जैव विविधता को संजोने का सन्देश देने का प्रण लिया. ‘प्लास्टिक के पर्यावरण पर दुष्प्रभाव’ विषय पर पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमे कैडेट सौम्या ने पहला, कैडेट ऋतु ने दूसरा और इन्नू ने तीसरा स्थान हासिल किया. विदित रहे की 12 हरियाणा एनसीसी बटालियन सोनीपत के निर्देशानुसार गत 9 से 29 मई तक लाइफ प्लेज का आयोजन तथा 30 मई से 5 जून तक कॉलेज एनसीसी यूनिट् द्वारा विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है जिनमें निबंध लेखन प्रतियोगिता, जल का संरक्षण और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, जागरूकता रैलियाँ, नुक्कड़ नाटक, वाद-विवाद आदि जैसी गतिविधियाँ शामिल है. ज्ञात रहे कि ‘मिशन लाइफ: लाइफ स्टाइल फॉर एनवायरमेंट’ मिशन लाइफ संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने और टिकाऊ जीवन को बढ़ावा देने के लिए भारत द्वारा की गई एक वैश्विक पहल है. यह विचार पहली बार 2021 में ग्लासगो में पार्टियों के 26वें संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में पेश किया गया था जिसमें बेकार खपत को कम करने के लिए एक सचेत और समझदार जीवन शैली के महत्व पर जोर दिया गया था.
कर्नल अनील यादव कमांडिंग ऑफिसर 12 हरियाणा एनसीसी बटालियन सोनीपत ने अपने सन्देश में कहा कि ‘मिशन लाइफ: लाइफ स्टाइल फॉर एनवायरमेंट’ के अंतर्गत राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा स्रोत की ओर बढ़ने और हमारे एवं अन्य देशों को शुद्ध-शून्य कार्बन पदचिह्न प्राप्त करने में मदद करने के लिए भारत द्वारा की गई एक पहल है. अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में भारत का नेतृत्व नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने और जीवाश्म ईंधन के उपयोग को कम करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाता है. आपदा रोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन के निर्माण का नेतृत्व करके भारत ने दुनिया को पर्यावरण संरक्षण की अपनी अवधारणा से अवगत कराया है और अब इसी सन्देश को एनसीसी कैडेट्स ने आगे बढ़ाना है. पर्यावरण को बचाने का अर्थ अपनी चेतना को जागृत करना है.
एनसीसी कैडेट्स का हौंसला बढाते हुए कॉलेज प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि हर किस्म की वनस्पति और पशुवर्ग पृथ्वी के वातावरण को बेहतर बनाने में अपना अमूल्य योगदान देते है जिससे अंत में पृथ्वी पर जीवन समृद्धशाली बनता है. सभी प्रजातियां एक दूसरे की मूलभूत जरूरतों को पूरा करती है और इनसे एक समृद्धशाली जैव विविधिता का निर्माण होता है. बेशक पिछले कई वर्षों से जैव विविधता को समृद्ध बनाये रखने पर जोर दिया जा रहा है परंतु फिर भी कुछ समय से इसकी गरिमा में गिरावट देखी गयी है और इसका मुख्य कारण है औद्योगिक फैक्टरियों से लगातार निकलता प्रदूषण और मानव का अत्यधिक लालच. इस प्रदूषण और लालच के कारण ही कई वनस्पतियों और जानवरों की प्रजातियां तक़रीबन विलुप्त हो गयी है और कई होने की कग़ार पर है. इस बदलाव का एक संकेत तो साफ़ है कि आने वाले समय में हमारी पृथ्वी पर भयंकर संकट खड़े होंगे. इससे जैव विविधता का संतुलन तो बिगड़ेगा ही, साथ ही मनुष्य के साथ जीव-जंतुओं के जीवन पर भी प्रश्नचिन्ह लगेगा. अगर हम आज भी नही चेते तो आने वाला समय और भी विकराल है और भविष्य हमें कभी माफ़ नहीं करेगा. भारत ने जलवायु परिवर्तन के खिलाफ अपनी लड़ाई का समर्थन करने के लिए कई पहल शुरू की हैं जिनमें राष्ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम (एनएपी), राष्ट्रीय हरित भारत मिशन (जीआईएम), जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीसीसी) और राष्ट्रीय जैव विविधता कार्य योजना शामिल हैं.
एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट बलजिंदर सिंह ने कहा कि हमारे लिए सबसे पहले यह जरुरी है कि हम वातावरण संबंधी मुसीबतों के प्रति खुद को संवेदनशील बनाए. कई देशों की सरकार लोगों के बीच जैव विविधता के बिगड़ते संतुलन को लेकर जागरूकता फैला रही है और कोशिश कर रही है की इस पर जल्दी काबू पाया जाये. हमारे देश की सरकार भी इसी दिशा में प्रयासरत है. यह हमारी भी जिम्मेदारी है की हम ऐसे नेक कार्यों में हिस्सा ले और वातावरण को शुद्ध बनाने में सरकार का भरपूर सहयोग करे. अब मनुष्य के तकनीक के प्रति बढ़ते प्रेम को कम करना आसान नहीं है परन्तु मनुष्य को इस तरफ सोचना ही होगा कि दूषित होते वातावरण से सिर्फ उसका ही नहीं सभी का नुकसान हो रहा है. प्रकृति से खिलवाड़ इंसान को बहुत भारी पड़ने वाला है.
एक अवसर पर डॉ नवीन गोयल, प्रो राकेश सिंगला, प्रो पवन सिंगला, डॉ रवि कुमार, डॉ राहुल जैन, डॉ एसके वर्मा, दीपक मित्तल समेत कई प्राध्यापकों एवं लगभग 55 कैडेट्स ने अपने घर और आस-पड़ोस में पौधे वितरित किये एवं लगाए.

Comments