Tuesday, July 21, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में एक दिवसीय ‘साइबर क्राइम जागरूकता’ कार्यशाला का आयोजन

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at April 11, 2023 Tags: , , , , ,

कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) और आईक्यूएसी सेल के संयुक्त तत्वाधान में हुआ आयोजन

हमें अपना ओटीपी, सीवीवी और पासवर्ड भूलकर भी किसी को नहीं देना चाहिए: सन्नी त्यागी साइबर क्राइम इन्वेस्टीगेशन विशेषज्ञ एवं हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश पुलिस के साइबर कंसलटेंट

लोभ, लालच और झांसा है साइबर क्राइम घटित होने के बड़ेकारण, साइबरक्राइमहोने पर 1930 नंबर पर तुरंत कॉल करें: धरमबीर डीएसपी (हेड क्वार्टर) पानीपत

साइबरक्राइमके शिकार व्यक्ति को पुलिस की मदद लेने में संकोच, शर्मऔर देरी नहीं करनी चाहिए: दीपक कुमार पीएसआई

BOL PANIPAT , 11 अप्रैल, एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में ‘साइबर क्राइम जागरूकता दिवस’ के अवसर पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमे बतौर मुख्य अतिथि धरमबीर डीएसपी (हेड क्वार्टर) पानीपत ने शिरकत की. अतिविशिष्ट मेहमान के तौर पर मोहम्मद माज़िद हुसैन एसएचओ पानीपत और धरमवीर एडिशनल एसएचओ साइबर क्राइम कार्यक्रम में उपस्थित रहे. उनके साथ पीएसआई दीपक कुमार, सुशील मलिक एएसआई और एचएस साइबर थाना सुनील कुमार भी मौजूद रहे. कार्यशाला के रिसोर्स पर्सन साइबर थ्रेट हरियाणा के संस्थापक एवं हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश पुलिस के साइबर कंसलटेंटसन्नी त्यागी रहे जिन्होनें साइबर क्राइम के प्रकारों, इन्हें करने के तरीकों और इनसे बचने के उपायों पर विस्तृत और व्यवहारिक ज्ञान और प्रशिक्षण दिया. माननीय मेहमानों का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, वाईक्यूएसी सेल के समन्वयक एवं एनएसएस प्रोग्राम अधिकारी डॉ राकेश गर्ग और डॉ संतोष कुमारी ने पुष्प रोपित गमलें भेंट करके किया.

     ज्ञात रहे कि सन्नी त्यागी को साइबर थ्रेट हरियाणा के संस्थापक होने का गौरव प्राप्त है. वे साइबर सिक्यूरिटी प्रोफेशनल और क्राइम इन्वेस्टीगेटर और हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश पुलिस के साइबर कंसलटेंट है. सन्नी त्यागी सीबीआई, एनआईए और सीएसईएम के साइबर फॉरेंसिक इन्वेस्टिगेटर भी है.

       सन्नी त्यागी साइबर क्राइम इन्वेस्टीगेशन विशेषज्ञ ने व्यावहारिक ज्ञान देते हुए छात्र-छात्राओं के साथ जीवंत संवाद किया और उनके सवालों के सटीक जवाब दिए. विकास अग्रवाल ने पूछा कि यदि ओटीपी की मदद से कोई हमारे पैसे निकाल ले तो हमें क्या करना चाहिए. इसके जवाब में सन्नी त्यागी ने कहा कि हमें बिना वक्त गवाएं 1930 साइबर हेल्प लाइन नंबर पर कॉल करनी चाहिए.cybercrime.gov.inपर जाकर भी हम अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते है. जितनी जल्दी हम अपनी शिकायत दर्ज करवाएंगे उतना ही फायदा हमें होगा. छात्रा ख़ुशी ने पूछा कि मोबाइल फ्राड से हम कैसे बच सकते है जिस पर सन्नी त्यागी ने कहा कि हमें भूल कर भी अपना ओटीपी किसी को नहीं देना चाहिए.अनचाहे लिंक और इमेल पर हमें क्लिक नहीं करना चाहिए. छात्र सौरभ ने पूछा कि पासवर्ड फ्राड से हम कैसे बच सकते है जिस पर सन्नी ने बताया कि हमें आसान, अपना जन्मदिन, अपनी गाड़ी के नंबर आदि जैसे पासवर्ड नहीं बनाने चाहिए. छात्र संदीप ने पूछा की कौन सी वेब साईट सुरक्षित होती है जिस पर सन्नी ने कहा कि .gov.inऔर .nic.inवाली साइट्स सरकारी हैऔर इसलिएसुरक्षित है. प्रियंका द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होनें साइबर फिशिंग को समझाया और कहा कि इसके माध्यम से किसी के पास स्पैम ईमेल भेजी जाती है ताकि वह व्यक्ति अपनी निजी जानकारी दे और उस जानकारी से फिरउसका नुकसान कर दिया जाए. ऐसीइमेल ज्यादातर आकर्षक होते है. वर्षा ने डाटा ब्रीच पर अपना सवाल पूछा. सन्नी त्यागी ने कहा कि डेटा उल्लंघन एक सुरक्षा उल्लंघन हैजिसमें संवेदनशील, संरक्षित या गोपनीय डेटा की प्रतिलिपि बनाई, प्रेषित, देखी याचुराई जाती है. ऐसा करने के लिए अनधिकृत व्यक्ति द्वारा उपयोग किया जाता है. ऐसी घटनाएं व्यक्तिगत लाभ या द्वेष (ब्लैक हैट्स), संगठित अपराध, राजनीतिक कार्यकर्ताओं या राष्ट्रीय सरकारों के लिए हैक करने वाले व्यक्तियों द्वारा की जाती है. फोटो मोर्फिंग तकनीक और फेक यूआरएल पर भी उन्होनें विस्तार से चर्चा की और इनसे बचने की सलाह दी. 
       धरमबीर डीएसपी (हेड क्वार्टर) पानीपत ने कहा कि साइबर अपराध एक ऐसा अपराध है जिसमें कंप्यूटर, आईओटी, मोबाईल, टेब और नेटवर्क इत्यादि शामिल होते है. किसी भी कंप्यूटर का अपराधिक स्थान पर मिलना या कंप्यूटर से कोई अपराध करना ही साइबर क्राइम कहलाता है. किसी की निजी जानकारी को कंप्यूटर से निकाल लेना या फिर चोरी कर लेना भी साइबर अपराध का ही हिस्सा है. कंप्यूटर अपराध भी कई प्रकार से किये जाते है जैसे कि जानकारी चोरी करना, जानकारी मिटाना, जानकारी मे फेर बदल करना, किसी कि जानकारी को किसी और को देना. साइबर क्राइम में स्पैम ईमेल,हैकिंग,फिशिंग, वायरस को डालना, किसी की जानकारी को ऑनलाइन प्राप्त करना या किसी पर हर वक़्त नजर रखना आदि भी शामिल होते है. साइबर क्राइम के घटित होने का सबसे बड़ा कारण लोभ, लालच और झांसा है.
       दीपक कुमार पीएसआई ने कहा कि हमें अपने डेबिट और क्रेडिट कार्ड का संभलकर इस्तेमाल करना चाहिए. अपना सीवीवी किसी भी हालत में किसी अन्य व्यक्ति के साथ शेयर नहीं करना चाहिए. हमें अपने कार्ड की वाई-फाई और अंतरराष्ट्रीय सुविधा को जरुरत के समय ही ऑन करना चाहिए. आजकल साइबर क्राइम का सबसे बड़ा आधार हमारा मोबाइल फ़ोन बन चुका है. आने वाले समय का सबसे बड़ा हथियार डाटा साबित होगा. उन्होनें कहा कि साइबर क्राइम को कुछ लोग वितीय क्राइम से जोड़कर ही देखते है जबकि ऐसा नहीं है.मोर्फिंग साइबर क्राइम का दूसरा घिनोना रूप है और युवाओं को इससे खासतौर पर बचना चाहिए. साइबर क्राइम होने की स्थिति में पुलिस के पास जाने में बिल्कुल भी संकोच और शर्म महसूस नहीं करनीचाहिए.

प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि बहुत से लोग सोशल नेटवर्किग साइटों पर सामाजिक, वैचारिक, धार्मिक और राजनैतिक अफवाह फैलाने का काम करते हैं. उनको इस बात का पता भी नहीं होता की यह सब भी साइबर अपराध और साइबर-आतंकवाद की श्रेणी में आता है. फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किंग पर अशोभनीय कमेंट करना और इंटरनेट पर धमकियॉ देना भी किसी अपराध से कम नहीं है. युवाओं को चाहिए कि वे इस प्रकार के गलत मार्ग पर चलने से बचे और अपने मोबाइल का सकारात्मक और रचनात्मक उपयोग ही करें.

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