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राष्ट्र निर्माण के लिए व्यक्ति निर्माण जरुरी : रामेश्वर दास

By LALIT SHARMA , in Politics , at June 25, 2022 Tags: , , , ,

-संघ शिक्षा वर्गों के माध्यम से व्यक्ति निर्माण का कार्य करता है संघ
-देश में आपदा या संकट के समय अग्रिम पंक्ति में रहते हैं संघ के स्वयंसेवक  

BOL PANIPAT ।  राष्ट्रीय  स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र प्रचारक प्रमुख रामेश्वर दास ने कहा कि संघ का कार्य गत 97 वर्र्षों से सतत चल रहा है। देशभर में 61 हजार शाखाएं प्रतिदिन लगती हैं और लाखों स्वयंसेवक इन शाखाओं में अभ्यास करने के लिए आते हैं। प्रत्येक वर्ष इन दिनों में संघ शिक्षा वर्ग लगते हैं और यह संघ शिक्षा वर्ग स्वयंसेवकों के लिए प्रशिक्षण कैम्प होते हैं। इस वर्ष देशभर में 104 स्थानों पर ऐसे वर्ग लगे हुए हैं। इन संघ शिक्षा वर्र्गों का उद्देश्य व्यक्ति निर्माण करना है। क्योंकि सरसंघचालक डॉ. केशव राव बलिराम हेडगेवार का मानना था कि अगर व्यक्ति ठीक होगा तो देश भी ठीक होगा।

रामेश्वर दास शनिवार को पट्टीकल्याणा में स्थित सेवा धाम में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र संघ शिक्षा वर्ग, द्वितीय वर्ष सामान्य के समापन कार्यक्रम को बतौर मुख्य वक्ता सम्बोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में मुख्यातिथि के तौर पर उद्योगपति सुरेंद्र कुमार आर्य ने शिरकत की। हरियाणा प्रांत संघचालक पवन जिंदल, वर्ग के सर्वाधिकारी सेवानिवृत्त मेजर जनरल सुरेश खजुरिया, वर्ग पालक उत्तर क्षेत्र प्रचार प्रमुख अनिल कुमार, हरियाणा प्रांत प्रचारक विजय कुमार, सह प्रांत प्रचारक सुरेंद्र पाल, पानीपत जिले के जिला संघचालक अनूप कुमार भी विशेष तौर पर मौजूद रहे। वर्ग कार्यवाह डॉ. चंद्रप्रकाश ने वृत्त निवेदन किया। वर्ग में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली पांचों राज्यों के 308 स्वयंसेवकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वजारोहण से किया गया। ध्वजारोहण के बाद प्रार्थना की गई। इसके बाद स्वयंसेवकों ने शारीरिक प्रदर्शन किया। ध्वजावतरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

रामेश्वर दास ने कहा कि व्यक्ति निर्माण से ही देश का निर्माण संभव है। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि एक बार स्कूल के कुछ विद्यार्थी विनोबा जी के पवनार आश्रम में गए तो उन्होंने विद्यार्थियों से पूछा कि क्या आपने कभी भारत का मानचित्र देखा है। विनोबा जी ने भारत के मानचित्र के टुकड़े विद्यार्थियों को देते हुए उन्हें जोडऩे के लिए कहा। विद्यार्थियों के काफी परिश्रम के बाद भी जब उनसे मानचित्र नहीं जुड़ा तो उन्होंने एक व्यक्ति के चित्र के टुकड़े उन्हें दिए तो विद्यार्थियों ने बड़े आराम से वो टुकड़े जोड़ दिए। बाद में जब उस चित्र को पलट कर देखा तो उसके पीछे भारत का मानचित्र बना हुआ था। विनोबा जी ने विद्यार्थियों को बताया कि जिस तरह आपने एक व्यक्ति के चित्र से भारत का मानचित्र बनाया है ठीक उसी तरह यदि भारत का निर्माण करना है तो व्यक्तियों का निर्माण करना होगा। जो बात विनोबा जी ने उस समय कही थी ठीक वही बात डॉ. हेडगेवार जी ने 1925 में कही। संघ आज भी व्यक्ति निर्माण के कार्य में ही लगा हुआ है। इस तरह के संघ शिक्षा वर्गों से निर्मित स्वयंसेवक समाज के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर समाज निर्माण और राष्टï्र जीवन को सुखी बनाने का काम करते हैं। जैसे श्रमिकों के क्षेत्र में भारतीय मजदूर संघ, कृषि क्षेत्र में भारतीय किसान संघ, विद्यार्थियों के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, शिक्षा के क्षेत्र में विद्या भारती, धार्मिक क्षेत्र में विश्व हिंदू परिषद, सामाजिक समरसता में भारत विकास परिषद, वनवासी कल्याण आश्रम आदि इस प्रकार से 30 ऐसे अखिल भारतीय संगठन समाज के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जब-जब भी समाज पर कोई आपदा या संकट आते हैं तो संघ के स्वयंसेवक मदद के लिए अग्रिम पंक्ति में खड़े हुए हैं। जैसे 1947 में विभाजन के समय लाखों हिंदू परिवारों को सुरक्षित बचा कर भारत लेकर आए। उनकी सहायता के लिए पंजाब रिलीफ कमेटी बनाकर उनके रहने, खाने व दवाइयों का इंतजाम किया। आंध्रप्रदेश में तूफान आया तो वहां भी स्वयंसेवकों ने सेवा कार्य किए। तूफान में मारे गए हजारों लोगों की लाशें वहां पड़ी थी, उन सभी का अंतिम संस्कार किया। इसी प्रकार गुजरात के भूकंप के दौरान भी सेवा कार्यों के लिए सबसे पहले स्वयंसेवक ही आगे आए थे। 1975 में उस समय की सरकार ने देश में आपातकाल लगाकर तानाशाही थौंपने का प्रयास किया था। उस समय भी स्वयंसेवकों ने जन जागरण व सत्याग्रह दोनों काम किए और देश में फिर से प्रजातंत्र बहाल करवाने का कार्य किया।

पंजाब में आतंकवाद के दौरान स्वयंसेवकों ने देश की एकता व अखंडता के लिए अनेक बलिदान दिए और आपसी भाईचारा बना कर रखा। कश्मीर में आतंकवाद हुआ, वहां भी कश्मीरी हिंदुओं की सहायता की। तुरंत प्रभाव से जम्मू-कश्मीर समिति का गठन कर पीडि़तों की सहायता की। 1995 में हरियाणा के डबवाली में अग्नि कांड हुआ तो वहां भी स्वयंसेवकों ने अपने प्राणों की आहुति देकर भी आग में फंसे हुए बच्चों को बचाया। उन्होंने बताया कि इस प्रकार देशभर में स्वयंसेवकों द्वारा सवा लाख सेवा कार्य चल रहे हैं। इसके अतिरिक्त प्रांतों में भी अपने सेवा कार्य चला रहे हैं। जैसे कि यह सेवा साधना केंद्र जहां हम बैठे हैं वह भी बन रहा है। इस सेवा केंद्र में भी कई तरह के सेवा कार्य चल रहे हैं।

इसके साथ-साथ संघ के स्वयंसेवकों द्वारा धर्म जागरण, ग्राम विकास, गौसेवा, परिवार प्रबोधन, सामाजिक समरस्ता और पर्यावरण 6 प्रकार की गतिविधियां भी चलाई जा रही हैं। इन सभी गतिविधियों के माध्यम से राष्ट्र जीवन को सुखी बनाने का कार्य चल रहा है। रामेश्वर दास ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से आह्वान करते हुए कहा कि वह भी संघ के कार्य को समझें और संघ द्वारा संचालित किसी भी सेवा के कार्य से जुड़कर समाज सेवा में अपना योगदान दें।

वर्ग कार्यवाह डॉ. चंद्रप्रकाश ने बताया कि इस 20 दिवसीय वर्ग में पांच राज्यों से 308 स्वयंसेवकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इनको प्रशिक्षण देने के लिए 38 शिक्षक व अन्य प्रबंधन के लिए 25 प्रबंधकों ने वर्ग में अपना सहयोग किया।

स्वयंसेवकों ने किया शारीरिक प्रदर्शन

संघ शिक्षा वर्ग के समापन समारोह के उपलक्ष्य में स्वयंसेवकों ने शारीरिक प्रदर्शन किया। इस दौरान स्वयंसेवकों ने इन 20 दिनों में लिए गए प्रशिक्षण की झलकियों में घोष, यष्टि, दंड युद्ध, नियुद्ध, योग, युद्धाभ्यास व खेलों का प्रदर्शन भी किया। इस अवसर पर समाज से आए लोगों को संघ को नजदीक से देखने व समझने का अवसर प्राप्त हुआ।

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