आई.बी.पीजी महाविद्यालय में संगोष्ठी का आयोजन
BOL PANIPAT : जीटी रोड पर स्थित आई.बी पीजी महाविद्यालय में इतिहास विभाग एवं संस्कृत विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया ।इस संगोष्ठी का मुख्य विषय संस्कृत एवं भारतीय संस्कृति था । संगोष्ठी के मुख्य वक्ता डॉ राजेंद्र रंजन चतुर्वेदी , जो विषय के प्रख्यात विद्वान हैं रहे। इस संगोष्ठी के अध्यक्ष दीपचंद्र निर्मोही रहे , जो कि पानीपत के प्रसिद्ध समाजसेवी एवं साहित्यकार हैं। संगोष्ठी में पानीपत व करनाल से शिक्षाविद, संस्कृत एवं साहित्य प्रेमी विभिन्न हस्तियां शामिल रही, जिनमें निर्मल दत्त, पूर्व प्राचार्य आर्य पीजी कॉलेज डॉक्टर ए.पी. जैन, डॉ. दिनेश कुमार सिंघल , हरिसिंह वर्मा एवं करनाल से अशोक भाटिया शामिल रहे।
संगोष्ठी के प्रारंभ में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ अजय गर्ग ने आज के विज्ञान व तकनीक के युग में संस्कृति की महत्ता को रेखांकित करते हुए विषय विषय की प्रासंगिकता को स्पष्ट किया ।मुख्य वक्ता डॉ राजेंद्र रंजन चतुर्वेदी जी ने संस्कृति के मूल स्त्रोत्र वेद मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुर्भवः अर्थात मनुष्य बनो । उन्होंने कहा कि स्वार्थ की दीवारें जो जाति, धर्म ,वर्ग ,संप्रदाय के नाम पर खड़ी की जा रही हैं ,यह दीवारें ही मानव संस्कृति में भेद करती हैं ।उन्होंने वेद एवं गीता के श्लोकों को उद्धृत करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति सामंजस्य का नाम है ।
संगोष्ठी के अध्यक्ष श्री दीपचंद निर्मोही ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन ने बताया कि संस्कारित होना ही सुसंस्कृत होना है ।उन्होंने भारत की मिली-जुली संस्कृति को रेखांकित किया । इस अवसर पर सुप्रसिद्ध लघु कथाकार डॉक्टर अशोक भाटिया तथा प्रोफेसर डॉ दिनेश कुमार सिंघल ने भी अपने विचार रखे । संगोष्ठी में उपस्थित इतिहास एवं संस्कृत विषय के विद्यार्थियों ने मुख्य वक्ता से विषय के संबंध में सार्थक प्रश्न पूछे तथा मुख्य वक्ता के मुखारविंद से उन प्रश्नों के उत्तर प्राप्त कर अपने जिज्ञासा को शांत किया।
संगोष्ठी का मंच संचालन संस्कृत विभाग संचालिका प्रोफेसर सोनिया वर्मा ने किया । उपस्थित अतिथि गण का औपचारिक परिचय इतिहास विभाग अध्यक्ष डॉ रामेश्वर दास ने किया। इस संगोष्ठी में ढाई सौ विद्यार्थी एवं महाविद्यालय के प्राध्यापक गण भी शामिल रहे जिनमें प्राचार्य डॉ मधु शर्मा प्रोफेसर पी के नरूला, डॉ. मोहम्मद इशाक, डॉ. किरण मदान, डॉ. सुनीत शर्मा और डॉ.अर्पणा गर्ग , प्रोफेसर अजयपाल, डॉ.शर्मिला यादव, प्रोफेसर विनय वाधवा सहित 30 से अधिक प्राध्यापक रहे । संगोष्ठी के उपरांत सभी ने महाविद्यालय के इतिहास संग्रहालय का दौरा किया तथा अपनी समितियां दर्ज की ।
अवसर पर महाविद्यालय के संस्कृत विभाग द्वारा 10 दिवसीय संस्कृत संभाषण शिविर का उद्घाटन किया गया ।संस्कृत विभाग संचालिका सोनिया वर्मा ने बताया की इस कार्यशाला में विद्यार्थियों को खेल एवं गीतों के माध्यम से संस्कृत को भाषा के रूप में बोलना सिखाया जाएगा । सभी विद्वान जनों ने इस कार्यशाला की कार्यशैली को देखा तथा इसकी सराहना की। आज के कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए डॉ अजय कुमार गर्ग ने दोनों विभागों को बधाई दी तथा विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दी।

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