Saturday, April 18, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में विश्व हाइपरटेंशन डे के अवसर पर सेमिनार का आयोजन

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at May 17, 2022 Tags: , , , ,

उचित खानपान, व्यायाम, तनाव रहित सक्रियता उच्च रक्तचाप से बचाव में पूर्णत कारगर : डॉ अनुपम अरोड़ा

BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में विश्व हाइपर टेंशन डे के अवसर पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया जिसमे कॉलेज के समस्त स्टाफ सदस्यों और विद्यार्थियों ने शिरकत कर हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) से दूर रहने के उपायों पर विस्तृत चर्चा की. प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने बतौर मुख्य वक्ता हाइपरटेंशन के कारणों, इससे होने वाले नुकसानों और इससे बचने के उपायों पर अपना व्याख्यान दिया. इस अवसर पर एक ‘हंसी की पाठशाला’ का भी आयोजन किया गया जिसमे विभिन्न स्टाफ सदस्यों ने हंसी-मजाक के माहौल में सभी को तनावमुक्त रहने का आह्वान किया. ज्ञात हो कि प्रत्येक वर्ष 17 मई को विश्व हाइपरटेंशन डे मनाया जाता है जिसका उद्देश्य उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) जैसी घातक बीमारी का पता लगाने और फिर उसे नियंत्रित या खत्म करने के उपायों को लागू कराना है. आज दुनियाभर में 130 करोड़ लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं. यह दिन लोगों को हाइपरटेंशन जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरुक करने के उद्देश्य से मनाया जाता है.

विश्व उच्च रक्तचाप दिवस का इस बार का थीम “अपने रक्तचाप को सही तरीके से मापे, इसे नियंत्रित करें, अधिक समय तक जीवित रहे” है. प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा की आजकल की दौड़-भाग भरी जिंदगी में लोग कम उम्र में ही हाइपरटेंशन या उच्च रक्तचाप का शिकार हो रहे हैं. ऐसे में एक संतुलित और तनाव रहित जिंदगी जीने के लिए लोगों को जागरुक करना बहुत ही आवश्यक हो गया है. इसी मकसद को हासिल करने के लिए हर साल विश्व हाइपरटेंशन डे मनाया जाता है. आज दुनिया में हर चौथा आदमी हाइपरटेंशन की समस्या से जूझ रहा है. हाइपरटेंशन ब्लड प्रेशर से जुड़ी एक ऐसी बीमारी है जिसमें रक्तचाप तय मानक से ज्यादा हो जाता है. असल में धमनियों के जरिए खून को दौड़ने के लिए प्रेशर की एक निश्चित मात्रा की जरूरत होती है. परन्तु कई बार खून का बहाव सामान्य से ज्यादा हो जाता है तो यह धमनी की दीवार पर ज्यादा दबाव डालता है और इसे ही हाइपरटेंशन कहते हैं. हाइपरटेंशन एक साइलेंट किलर है जो इंसान को धीरे-धीरे दबोचता है. कई बार इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति में किसी भी तरह के लक्षण नजर नहीं आते है परन्तु यह उसके कार्डियोवस्कुलर सिस्टम और किडनी को नुकसान पहुंचाते रहते है.

हाइपरटेंशन होने पर ज्यादा पसीना आना, घबराहट होना, गुस्सा आना, चिडचिडापन, अनिद्रा जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. ज्यादा गंभीर मरीजों में तेज सिरदर्द और नाक से खून भी आ सकता है. हमारी अनियमित दिनचर्या और अनुचित खान-पान की वजह से रक्त चाप पर भी इसका असर पड़ता है जिसके कारण हमारा उच्च रक्तचाप हो जाता है. उच्च और कम, दोनों ही तरह के रक्तचाप होने पर हमें विशेष ध्यान देना चाहिए. वैसे तो आजकल वो बीमारियाँ बच्चों में भी आने लगी है जो कल तक बड़ो तक ही सीमित थी. फिर भी 30 वर्ष से ऊपर के सभी लोगों के रक्तचाप की जांच अवश्य करवाते रहना चाहिए.

नमक का अधिक मात्रा में सेवन, अनियमित दिनचर्या, अनियमित खानपान, तनाव, म्रपान या नशीले चीजों का सेवन करना, अत्यधिक वजन का बढ़ना हाइपरटेंशन होने के मुख्य कारण है. हरी साग-सब्जियों के अधिक सेवन, नमक के कम उपयोग से, नशीले और धूम्रपान जैसी चीजों का सेवन ना करके, नियमित समय पर डॉक्टर से जांच और परामर्श से और व्यायाम को अपना कर हम इस बिमारी से बच सकते है. इस अवसर पर स्टाफ सदस्यों में डॉ एसके वर्मा, डॉ मुकेश पुनिया, प्रो अन्नू आहूजा, प्रो मयंक अरोड़ा, दीपक मित्तल आदि उपस्थित रहे.

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