गांधी जी जैसी अद्भुत प्रतिभा का अवतरण हम सभी के लिए प्ररेणा का विषय : निर्मल दत्त
BOL PANIPAT :12 फरवरी 2022: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अस्थि विसर्जन दिवस पर आज खादी आश्रम, पानीपत के श्री सोमभाई हाल में खादी आश्रम, पानीपत के तत्वावधान में खादी आश्रम, पानीपत एवं भारतीय खादी ग्रामोद्योग संघ उत्तरी क्षेत्र पानीपत तथा विद्या भारती माॅडर्न स्कूल के सहयोग से एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सभा की अध्यक्षता श्रीमती निर्मल दत्त ने की तथा सभा का मंच संचालन श्रीमती शालिनी ने किया। सभा का आरंभ विद्या भारती माॅडर्न स्कूल की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत गांधी जी के प्रिय भजन ‘‘वैष्णव जन ते तेने कहिए ….’’ से किया गया।
इस अवसर पर खादी आश्रम पानीपत की अध्यक्षा श्रीमती निर्मल दत्त ने बोलते हुए कहा कि गांधी जी जैसी अद्भुत प्रतिभा का अवतरण हम सभी के लिए प्ररेणा का विषय है। सत्य और अहिंसा के बल पर अंग्रेजों से भारत को स्वतन्त्र करवाकर हम सभी को स्वतन्त्र भारत का अनमोल उपहार देने वाले महापुरूष गांधी जी को राष्ट्र ने राष्ट्रपिता के रूप में स्वीकार किया। भारत ही नहीं बल्कि पूरे विष्वपटल पर महात्मा गांधी सिर्फ एक नाम नहीं अपितु षांति और अहिंसा का प्रतीक हैं। महात्मा गांधी के पूर्व भी शांति और अहिंसा की अवधारणा फलित थी परन्तु उन्होंने जिस प्रकार सत्याग्रह, शांति व अहिंसा के रास्तों पर चलते हुए अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर किया, उसका कोई दूसरा उदाहरण विश्व इतिहास में देखने को नहीं मिलता। तभी तो प्रख्यात वैज्ञानिक आइंस्टीन ने कहा था कि ‘‘हजार साल बाद आने वाली नस्लें इस बात पर मुश्किल से विश्वास करेंगी कि हाड़-मांस से बना ऐसा कोई इंसान धरती पर कभी आया था’’।
खादी आश्रम, पानीपत के सचिव श्री मुकेश कुमार शर्मा ने इस अवसर पर बोलते हुए कहा कि गांधी जी ने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चल कर ही देष को आजादी दिलवाई। चर्खे के महत्व को बताते हुए कहा कि चर्खा स्वदेषी का प्रतीक है, आजादी के समय यह चर्खा ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ तोप बन गया था। चर्खे से लोगों में स्वदेषी की भावना जागृत हुई और लोगों ने चर्खे से बने खादी वस्त्रों का प्रयोग करना शुरू कर दिया और विदेश वस्त्रों का बहिष्कार किया गया जिसके कारण ब्रिटिश साम्राज्यवाद का यहां से अन्त हुआ। उन्होंने उपस्थित लोगों से अपील की कि वे अपने जीवन में केवल स्वदेषी वस्तुओं का उपयोग करें तथा विदेशी माल का बहिष्कार करें, यहीं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
विद्या भारती माॅडर्न स्कूल की प्रिंसिपल कुमारी आषा ने कहा कि खादी के मायने केवल हाथ से कता एवं हाथ से बुना वस्त्र नहीं है बल्कि एक विचार है जो कि विलुप्त होता जा रहा है। इसलिये हम सभी गांधीवादियों को आज के परिपेक्ष्य में उक्त गांधी विचार को जीवन्त रखना न केवल आवश्यक है बल्कि समाज में जागरूकता की दृष्टि से भी जरूरी है इसके लिए हम सभी को सामूहिक प्रयास करना होगा तभी हम इस उद्देश्य में सफल हो पाएगें।
इस अवसर पर श्री जगदीप चन्द, श्री अजीत पाल, श्री ईष्वर पाल, श्री बिषम्बर दास, श्री राजकुमार, श्रीमती मीनाक्षी, श्रीमती जसनीत आदि ने भी अपने-2 श्रद्धा-सुमन अर्पित किये तथा खादी कार्यकर्ताओं द्वारा चरखा कताई करके सूत्र यज्ञ द्वारा पूज्य बापू को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सभा में पानीपत नगर के काफी संख्या में नागरिक एवं संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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