विभाजन का दर्द पीढिय़ों तक रहा कायम, इतिहास हमें एकता और भाईचारे का संदेश देता है: उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ
विभाजन की पीड़ा बयां करते हुए छलक उठा वक्ताओं का दर्द, विस्थापितों को किया सम्मानित
इतिहास की त्रासदी से सीख लेकर मजबूत बनाएं राष्ट्र, विभाजन विभीषिका कार्यक्रम में बोले वक्ता
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर सम्मानित हुए विस्थापित, वक्ताओं ने सुनाई दर्दनाक दास्तां
BOL PANIPAT , 14 अगस्त। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के उपलक्ष्य में शुक्रवार को जिला प्रशासन की ओर से जिला सचिवालय सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देश के विभाजन के दौरान विस्थापित हुए लोगों की पीड़ा और संघर्ष को याद किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान विभाजन के समय विस्थापित हुए करीब एक दर्जन लोगों को जिला प्रशासन की ओर से गर्म चादर भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने विभाजन के समय विस्थापित हुए लोगों को सम्मानित करते हुए कहा कि इन लोगों का संघर्ष और धैर्य देश के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद इन लोगों ने हार नहीं मानी और नए स्थानों पर अपने जीवन को फिर से स्थापित किया।
उपायुक्त डॉ. हरीश ने कहा कि विभाजन की त्रासदी को याद करते हुए आज भी मन विचलित हो जाता है। धर्म के नाम पर हुआ विभाजन अपने पीछे ऐसा दर्द छोड़ गया, जिसे पीढिय़ां आज तक नहीं भुला पाई हैं। लाखों लोगों ने अपने प्राण गंवाए और करोड़ों लोगों को अपना घर-बार छोडक़र विस्थापित होना पड़ा। उन्होंने कहा कि इतिहास को याद करने का उद्देश्य केवल अतीत को दोहराना नहीं, बल्कि उससे सीख लेकर भविष्य को बेहतर बनाना है। उपायुक्त ने कहा कि हमें यह समझना होगा कि किन परिस्थितियों में समाज में दूरियां बढ़ीं और विभाजन जैसी भयावह स्थिति पैदा हुई। अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति ने समाज को बांटने का काम किया। आज हमारा दायित्व है कि धर्म, जाति और भाषा के नाम पर किसी प्रकार का भेदभाव न होने दें। देश की एकता, अखंडता और भाईचारा ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।
मेयर कोमल सैनी ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम हमें इतिहास से अवगत कराने के साथ-साथ उन लोगों के संघर्ष और पीड़ा को समझने का अवसर देते हैं, जिन्होंने विभाजन के समय अपना घर, जमीन और संपत्ति तक छोड़ दी थी। वक्ता रमेश नागरू ने कहा कि विभाजन के दर्द को भूलना नहीं चाहिए, बल्कि उससे सीख लेकर ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जिसमें समाज में नफरत और भेदभाव के लिए कोई स्थान न हो। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को यह बताना जरूरी है कि देश की एकता और भाईचारे को बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है।
वक्ता तेज सिंह ने कहा कि विभाजन के दौरान लोगों ने जो परिस्थितियां झेलीं, उनकी कल्पना करना भी मुश्किल है। इतिहास की इन घटनाओं को आने वाली पीढिय़ों तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि वे देश की एकता और अखंडता का महत्व समझ सकें। वक्ता रघु गोविंद ने कहा कि विभाजन केवल जमीन का बंटवारा नहीं था, बल्कि लाखों परिवारों के सपनों, रिश्तों और जीवन का बिखराव था। अपने घरों से उजडक़र आए लोगों ने नए स्थानों पर कठिन संघर्ष करते हुए जीवन को दोबारा खड़ा किया। कार्यक्रम में सांसद प्रतिनिधि गजेंद्र सलूजा के संबोधन में विभाजन का दर्द साफ झलका। उन्होंने उस दौर की मानवीय त्रासदी से जुड़ी घटनाओं को एक-एक कर लोगों के सामने रखा। इस अवसर पर सीईओ जिला परिषद डॉ. किरण सिंह, नगराधीश टीनू पोसवाल, जिला परिषद चेयरपर्सन ज्योति शर्मा सहित जिला प्रशासन के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

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