एसडी पीजी कॉलेज पानीपत के दो खिलाड़ियों ने झटके आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी वुशू चैंपियनशिप में पदक
पांच खिलाड़ियों का हुआ आल इंडिया इंटरयूनिवर्सिटी ताओलू चैंपियनशिप के लिए चयन
6 से 11 फरवरी तक चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में हुआ आल इंडिया चैंपियनशिप का आयोजन
लचीलेपन, सजगता, ताकत, धीरज और चपलता काप्रतीकहै वुशू: डॉ अनुपम अरोड़ा
BOL PANIPAT ,13फरवरी, एसडी पीजी कॉलेज पानीपतके बीए द्वितीय वर्ष के खिलाड़ी जय ने आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी वुशू चैंपियनशिप में रजत पदक जीत कर कॉलेज और जिले का मान बढाया है. जय ने यह उपलब्धि वुशू की ताईजिजियान विधा में हासिल की. वुशू में जय अब तक 6 राष्ट्रीय और 6 राज्य स्तरीय मेडल्स झटक चुका है जिसमे गोल्ड मेडल्स की भरमार है. इस चैंपियनशिप का आयोजन 6 से 11 फरवरी तक चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में हुआ. इसी प्रकार वुशू की जैंशु विधा में लावन्या ने आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में रजत पदक जीत कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. लावन्या इससे पहले कुरुक्षेत्र विश्वविधालय की जैंशु विधा में भी रजत पदक पर कब्ज़ा कर चुकी है. कॉलेज के लिए एक और उपलब्धि यह रही कि वुशू की ताओलू विधा में 5 खिलाड़ियों का चयन आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी ताओलू चैंपियनशिप के लिए हो गया जिसमे बीए प्रथम के जय, प्रशांत, नेहा, बीएससी प्रथम की लावन्या और एमए प्रथम के अमित शामिल है.
जय, लावन्या, प्रशांत, नेहा और अमित का कॉलेज पहुँचने पर स्वागत एसडी कॉलेज प्रधान पवन गोयल, प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, शारीरिक शिक्षा विभागाध्यक्ष डॉ सुशीला बेनीवाल, प्रो रजनी, ग्राउंड्स मैन प्रताप और अन्य प्राध्यापकों ने किया. जय और लावन्या तोइससे पहले भी राष्ट्रीय,राज्य स्तरीय और जिला स्तरीय खेलों में शानदार प्रदर्शन के दम पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते आ रहे है.
एसडी पीजी कॉलेज प्रधान पवन गोयल ने अपने सन्देश में कहा कि आज के समय में खेलो में भाग लेने केहमें अनेकों फायदे मिलते है. व्यक्ति का रूप और व्यक्तित्व खेलो से ही बनता और निखरता है. खेल के मैदान और मुकाबले में हर खिलाड़ी अगर लगन के साथ भाग ले तो न सिर्फ हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है बल्कि परस्पर प्यार और सदभाव में भी वृद्धि होती है. माता-पिता आज भी चाहतें हैं कि उनका बेटा या बेटी खिलाड़ी की जगह डाक्टर-इंजिनियर बने परन्तु जय, लावन्या, प्रशांत, नेहा और अमित की जीत ने खेल के महत्व को समाज में एक बार फिर स्थापित किया है. कॉलेज ऐसे खिलाडियों का निरंतर मार्गदर्शन करता रहेगा. तनाव और अवसाद से भरी आज की आधुनिक जीवन शैली में खेल ही हमें स्वस्थ और तनाव मुक्त रख सकते है. वुशू एक तपस्या है और इसमें जो जितनी अधिक मेहनत करेगा उतनी ही सफलता उसे मिलेगी. वुशू सोने की तरह होती है जिसमे जितना अधिक हम तपेंगे उतना ही निखार हममें आएगा.
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने जय, लावन्या, प्रशांत, नेहा और अमित की भरपूर प्रशंसा की और कहा कि इन खिलाड़ियों की उपलब्धि अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे न सिर्फ ये सभी खिलाड़ी जीवन में सफलता की सीढियां चढ़ेंगे बल्कि इससे दूसरे विद्यार्थियों को भी भरपूर प्रेरणा मिलेगी. आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप एक प्रतिष्ठित प्रतियोगिता है और इसमें भाग लेना मात्र ही हर खिलाड़ी का सपना होता है.जय, लावन्या, प्रशांत, नेहा और अमित ने तो मैडल प्राप्त करके एक नई बुलंदी को छुआ है. जय, लावन्या, प्रशांत, नेहा और अमित जल्द अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खुद को स्थापित करे यही उनके कामना है. वुशू का खेल लचीलेपन, सजगता, ताकत, धीरज और चपलता का प्रतीक है.
डॉ सुशीला बेनीवाल ने कहा कि ताओलू विधा अपनी परछाईयों से लड़ने जैसा खेल है. इसमें केवल एक खिलाड़ी से नहीं बल्कि कइयों से लड़ना पड़ता है. इसमें अच्छा प्रदर्शन करने के लिए खिलाड़ी में ताकत की जरूरत होती है और उनमें लचीलापन भी होना चाहिए. इसके अलावा 360 डिग्री कूदने और स्पिन करने के लिए खिलाड़ी में एक्रोबेटिक क्षमता की जरूरत है. सबसे बड़ी बात है कि इस खेल को खेलने के लिए मानसिक स्थिरता का होना अत्यंत आवश्यक है क्यूंकि इसके बिना खिलाड़ी आक्रामक बने नहीं रह सकते. आक्रमण भी बेहद नियंत्रित होना चाहिए इसलिए खिलाडियों की ट्रेनिंग के दौरान उन्हें मेडिटेशन भी कराई जाती है.
इस अवसर पर स्टाफ सदस्यों में डॉ एसके वर्मा, डॉ मुकेश पुनिया, दीपक मित्तल आदि भी मौजूद रहे.

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