Monday, May 18, 2026
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सामाजिक परिर्वतन के लिए मानसिक परिर्वतन जरूरी- मीनू सिंह

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at November 26, 2024 Tags: , , , , ,

संविधान दिवस पर हुआ वाद-विवाद व भाषण प्रतियोगिता का आयोजन

BOL PANIPAT – मंगलवार 26 नवंबर 2024, आर्य पीजी कॉलेज के कानूनी प्रकोष्ठ, हिंदी साहित्य परिषद, एनएसएस, रेड क्रॉस व हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, पंचकुला एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, पानीपत के संयुक्त तत्वावधान में संविधान दिवस के अवसर पर वाद-विवाद वा भाषण प्रतियोगिता का आयोजन करवाया गया। प्रतियोगिता में कॉलेज के सभी संकायों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पानीपत की सचिव मीनू सिंह ने मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की। कॉलेज प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता व उपाचार्या डॉ. अनुराधा सिंह ने मुख्य अतिथि का कॉलेज प्रांगण में पंहुचने पर पुष्पगुच्छ दे कर स्वागत किया।

प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि यह संविधान ही है जो हमें एक आजाद देश का आजाद नागरिक की भावना का एहसास कराता है। जहां सविधान के दिए मौलिक अधिकार हमारी ढाल बनकर हमें हमारा हक दिलाते हैं, वहीं इसमें दिए मौलिक कर्तव्य हमें हमारी जिम्मेदारियां भी याद दिलाते हैं। उन्होंने बताया की साल 2015 में भारत सरकार ने 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया था। भारत का संविधान दुनिया भर के बेहतरीन संविधानों को मिलाकर बनाया गया है और ये दुनिया का सबसे बडा लिखित संविधान हैं। इसमें विभिन्न देशों के संविधानों से अच्छी बातें ली गई हैं। अंत में उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों को 200-200 रूपए की धन दी जाएगी।

मुख्य अतिथि मीनू सिंह ने अपने संबोधन में बताया कि विधिक सेवा प्राधिकरण न केवल जिला व राज्य स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ न्याय दिलाने का काम भी कर रहा है। उन्होंने बताया कि विधिक सेवा प्राधिकरण समय-समय पर स्कूलों व महाविद्यालयों में ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करता रहता है जिसमें विद्यार्थियों व युवाओं को समाज में व्याप्त बुराइयों जैसे घरेलू हिंसा, दहेज प्रथा, महिलाओं का शोषण इत्यादि के खिलाफ कैसे कानून का सहारा लेकर न्याय पाया जा सकता है और इन बुराइयों को समाप्त करने की ओर अग्रसर हुआ जा सकता है। साथ ही उन्होंने पोक्सो एक्ट, यातायात के नियमों का पालन व युवाओं को ड्रग्स के प्रति सचेत किया। अंत में उन्होंने कहा कि सामाजिक परिर्वतन के लिए मानसिक परिर्वतन जरूरी है।

कॉलेज की उपाचार्या व कॉलेज की कानूनी प्रकोष्ठ की समंवयक डॉ. अनुराधा सिंह ने कहा कि भारत भले ही विविधताओं से भरा देश हो, विभिन्न राज्यों में अलग-अलग भाषाओं,जातियों, धर्म और वेश-भूषाओं वाले लोग रहते हों, सबका रहन-सहन अलग हो, लेकिन संविधान दिवस का दिन सबके लिए बहुत ज्यादा महत्व रखता है। देश के सभी लोगों पर जब संविधान लागू होता है तो राष्ट्रीय एकता को मजबूती मिलती है। उन्होंने बताया कि आज की प्रतियोगिता में वाद-विवाद प्रतियोगिता का विषय “संविधान लोकतंत्र की आत्मा है” रहा।  विद्यार्थियों ने दिए गए विषय पर  बहुत ही शानदार विचार प्रस्तुत किए।

प्रतियोगिताओं के परिणाम इस प्रकार रहे :

प्रथम स्थान बी.कॉम वोकेशनल द्वितीय वर्ष छात्रा सुषमा, द्वितीय स्थान एम.कॉम प्रथम वर्ष की छात्रा दिव्या वहीं तृतीय स्थान बीए तृतीय वर्ष के छात्र अंकित व बीसीए प्रथम वर्ष की छात्रा केश्वी ने हासिल किया।

प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल की भूमिका हिंदी विभाग की प्राध्यापिका डॉ. शालिनी, कविता व राजनीति विज्ञान के प्राध्यापक दीपक ने निभाई। वहीं मंच संचालन इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विजय सिंह ने किया।

इस अवसर पर पैनल एडवोकेट सुमन लता, चंचल, जिला संनवयक डॉ. हितेष, कॉलेज की एनएसएस इकाई की प्रभारी डॉ. मनीषा ढुढेजा, प्राध्यापक गोपाल मलिक, राजा तोमर, ललित, सुरेंद्र, दीपक, संदीप के साथ सभी स्टाफ सदस्य मौजूद रहे।   

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