एमडीडी ऑफ इंडिया ने महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ मिलकर बाल विवाह के खिलाफ प्रशिक्षण कार्यशाला का किया आयोजन।
BOL PANIPAT : कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रन फाऊंडेशन द्वारा समर्थित एम डी डी ऑफ इंडिया संस्था द्वारा पानीपत ग्रामीण की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ बाल विवाह कानून, पॉक्सो एक्ट, बाल श्रम अधिनियम के बारे में प्रशिक्षण देकर उन्हें बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई गई। इसमें बाल विवाह के दुष्परिणामों तथा बाल विवाह निषेध अधिनियम के बारे में विस्तार से बताया गया। संजय कुमार ने बताया कि बाल विवाह मानवता के खिलाफ अपराध है। जिससे लड़कियों के शिक्षा, स्वास्थ्य व सुरक्षा के अधिकार का हनन है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार यह केवल कानून एवं व्यवस्था का ही मसला नहीं है बल्कि यह एक गंभीर सामाजिक समस्या है। ऐसे में बाल विवाह के खिलाफ लगातार जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है; तभी लड़कियां अपने बचपन को अपने इच्छा अनुसार जी पाएगी।
एम डी डी जिला समन्वयक संजय कुमार ने कहा कि एम डी डी ऑफ इंडिया पिछले कई वर्षों से बालाधिकारों को लेकर कार्यरत है और “न्याय तक पहुंच” कार्यक्रम के अंतर्गत बाल विवाह, बाल दुर्व्यवहार व बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाए हुए है। सभी ने एक स्वर से शपथ ली कि वे किसी भी ऐसी शादी में शामिल नहीं होंगे जिसमें वर या वधु की उम्र कम हो और ऐसी शादियां रोकने का हर संभव प्रयास करेंगे ताकि बच्चों के भविष्य को बचाया जा सके। सुपरवाइजर सुशीला ने बताया कि एमडीडी ऑफ इंडिया की यह मुहिम बेहद सराहनीय है क्योंकि बाल विवाह लड़कियों की खिलाफ एक सामाजिक अपराध है और उनके मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है। हमें मिलकर इस कुरीति को जड़ से खत्म करना होगा।
‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान 200 से भी ज्यादा गैरसरकारी संगठनों का गठबंधन है जो 2030 तक बाल विवाह के खात्मे के लिए पूरे देश में काम कर रहे हैं। ये सभी सहयोगी संगठन इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए एक समग्र रणनीति ‘पिकेट’ पर अमल कर रहे हैं जिसमें नीति, संस्थान, संम्मिलन, ज्ञान, परिवेश, तकनीक जैसी चीजें शामिल हैं। धार्मिक नेताओं और समुदायों के साथ साझा प्रयासों से इसने इस अपराध के खात्मे के लिए 4.90 करोड़ लोगों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई है।

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