पानीपत में मदरसा छात्रों की गई दस्तारबंदी. छोटी उम्र में बने कुरान-ए-हाफिज.
-मौलाना ने कुरान-ए-पाक की शिक्षाओं पर विस्तार से डाला गया प्रकाश
-कार्यक्रम में बच्चों ने देशभक्ति, कविता, भाषण, पेश कर दिखाई प्रतिभा
-नमाज के बाद मुल्क में सौहार्द और अमन चैन की दुआ मांगी गई
BOL PANIPAT । मदरसा इस्लिामिया तजवीदुल कुरान ईदगाह मॉडल टाउन पानीपत में जुमा के रोज इजलास-ए-आम के तहत चार बच्चों को कुरान-ए-हाफिज (कुरान को कंठस्थ) करने वालों की दस्तारबंदी (पगड़ी बांधना) की गई। इस मौके पर मुख्यातिथि मौलाना आकिल साहब गढ़ी दौलत रहे जबकि मौलाना महफूज साहब, मौलाना वासिल कैरान, सैखुल हरीश जामिया बदरूल उलूम गढ़ी दौलत भी मुख्य रूप से मौजूद रहे।
मौलाना सादिक साहब संचालक मदरसा की सरपरस्ती में मौलाना आकिल साहब कुरान ए हाफिज करने वाले बच्चों की दस्तारबंदी की। इस अवसर पर इलाके के सैकेंड़ों लोगों ने शिरकत की। मौलान आकिल साहब ने अपने बया में फरमाया कि कुरआन अल्लाह की अहम किताब है इसे अपनी जिंदगी में दाखिल करना चाहिए, कुरान का पढऩा सुनना बेहद सवाब का काम है।

कुरान पाक पूरी मानवता के लिए
डॉक्टर मौलाना आकिल साहब ने अपने बयान में कहा कि कुरान पाक सिर्फ मुसलमानों के लिए ही नहीं बल्कि पूरी मानवता के लिए इसलिए हमें कुरआन के सही पैगाम को आम करने की जरूरत है ।
इसके अलावा मौलाना महफूज रममान कैराना ने भी बयान किया और तालीम हासिल करने पर समाज को शिक्षित बनाने पर जोर दिया है। मौलाना मुर्सलीन बापौली ने अपने बयान में कहा कि कुरआन शरीफ दुनिया की एक ऐसी किताब है जो सीधे रास्ते की तरफ लोगों को बुलाती है और मानवता की खिदमत की दावत देती है। मुप-ती दाऊद साहब ने युवाओं का आह्वान किया कि वे सोशल मीडिया और दिखावे से बाहर निकलकर पैगंबर साहब के दिखाए रास्ते पर चले। उन्होंने कहा कि जिन बच्चों ने आज कुरान ए हाफिज पूरा किया है वह दुनिया के सबसे दौलतमंद इंसानों की गिरती में आ गए हैं। इसलिए अपने मां-बाप अपने बच्चों को द्दीन की शिक्षा के साथ साथ आधुनिक शिक्षा पर जोर दें। इस अवसर पर छोटे-छोटे बच्चों ने अपने-अपने खूबसूरत कार्यक्रम प्रस्तुत किए। साथ ही मदरसे के चार बच्चों पाक कंठस्थ करने पर पगड़ी बांधी गई।
कुरान-ए-करीब पूरा करने वाले बच्चे
मो. अत्ताउल्ला (15 साल), मो. आजाद (12), मो. अरसद (14), मौ. मुस्सवीर शामिल रहे।
इन लोगों का रहा सहयोग
कार्यक्रम के आयोजन में मदरसा संचालक मौलान सादिक साहब, मो. असद सलीम, जमसेद अली, अतिक आलम, अजीज खान, मा. कबीर समेत तमाम हजरात मौजूद रहे।
मदरसे के जिम्मेदार मौलाना साबिक ने सभी मेहमानों का आभार व्यक्त किया।

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