एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में दो दिवसीय ‘बसंत आयो रे’ उत्सव की शानदार शुरुआत
–महिला प्रकोष्ठ, आईक्यूएसी, सोशल साइंस एसोसिएशन, एनएसएस और पर्यावरण बचाओ सोसाइटी के संयुक्त तत्वाधान में हो रहा आयोजन
–नव निर्माण, नव प्राण और नए हौंसले का प्रतीक है बसंत पंचमी का त्यौहार: डॉ नवीन गोयल
BOL PANIPAT: 31 जनवरी,
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में दो दिवसीय ‘बसंत आयो रे’ उत्सव के पहले दिन विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिसमें छात्र-छात्राओं ने भारी संख्या में भाग लिया और बसंत पंचमी के त्यौहार को हर्षौल्लास एवं आदर भाव के साथ मनाया । पहले दिन पॉट डेकोरेशन, पूजा को थाली को सजाना, बिना आग के खाना बनाना और रंगोली प्रतियोगिताओं के आयोजन किया गया । सम्पूर्ण आयोजन महिला प्रकोष्ठ, आईक्यूएसी, सोशल साइंस एसोसिएशन, एनएसएस और पर्यावरण बचाओ सोसाइटी के संयुक्त तत्वाधान में हो रहा है । उप-प्राचार्य डॉ नवीन गोयल की अगुआई में छात्र-छात्राओं ने कॉलेज प्रांगण में देवी सरस्वती की पूजा अर्चना की और सभी के लिए मंगल कामना एवं जीवन में कामयाबी की प्रार्थना की । माँ सरस्वती की वंदना करते हुए उप-प्राचार्य डॉ नवीन गोयल ने विद्यार्थीयों को इन्टरनेट एवं मोबाईल पर उपलब्ध ज्ञान का सदुपयोग करने की शपथ भी दिलाई । कार्यक्रमों में प्रो अन्नू आहूजा, डॉ संतोष कुमारी, डॉ मोनिका खुराना, प्रो तन्नु मेहता, प्रो निधि ने सक्रियता के साथ हिस्सा लिया । आज के विजेता प्रतिभागियों को कल नकद पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा ।
डॉ नवीन गोयल ने कहा कि आज के दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है । वसंत ऋतु को मधुमास के नाम से भी जाना जाता है और इसके आरम्भ होने के साथ ही सर्दी का समापन शुरू हो जाता है । इस मौसम में सभी वृक्ष पुरानी पत्तियों को त्यागकर नई पत्तियों एवं पुष्पों को जन्म देते हैं । नव निर्माण, नव प्राण और नए हौंसले का प्रतीक है बसंत पंचमी का त्यौहार । आज के विद्यार्थी कितने भाग्यशाली है की सूचना, प्रौध्यौगिकी और तकनीक के इस युग में उन्हें मोबाइल और इन्टरनेट के माध्यम से घर बैठे ही हर प्रकार का ज्ञान एवं जानकारी उपलब्ध है । बस जरुरत इसके सदुपयोग की है । इस पावन त्यौहार पर वे हर विद्यार्थी से यह प्रण लेना चाहते है कि वे मोबाइल के दुरूपयोग से न सिर्फ बचेंगे बल्कि अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को भी जागरूक और सचेत करेंगे । ऐसी भी मान्यता है कि वसंत पंचमी की तिथि पर विद्या और ज्ञान की अधिष्ठाती देवी मां सरस्वती का जन्म हुआ था और इसीलिए विद्याथियों के लिए यह दिन और भी महत्व रखता है । मां सरस्वती विद्या और बुद्धि प्रदाता हैं । संगीत की उत्पत्ति करने के कारण वे संगीत की देवी भी हैं । बसन्त पंचमी के दिन को माँ सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता हैं । ऋग्वेद में भगवती सरस्वती का वर्णन करते हुए कहा गया है – ‘प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु’ अर्थात मां परम चेतना हैं और वे हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं । हममें जो आचार और मेधा है उसका आधार भगवती सरस्वती ही हैं । इनकी समृद्धि और स्वरूप का वैभव अद्भुत है ।
डॉ मोनिका खुराना ने बसंत पंचमी के महत्व पर बोलते हुए कहा कि प्राचीन भारत में पूरे साल को जिन छह मौसमों में बाँटा जाता था उनमें वसंत लोगों का सबसे चहेता मौसम था । इस दिन फूलों पर बहार आ जाती है । खेतों मे सरसों सोने की तरह चमकने लगती है । जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगतीं है । आम के पेड़ों पर बौर आ जाता है और हर तरफ़ रंग-बिरंगी तितलियाँ मँडराने लगतीं है ।
विभिन्न प्रतियोगिताओं के परिणाम इस प्रकार रहे –
पॉट डेकोरेशन : प्रथम पारस बीए- प्रथम, द्वितीय पिंकी बीए- तृतीय, तृतीय दीपांशु बीए- प्रथम , सांत्वना मीनू बीएससी- मेडिकल , निशांत बीए- तृतीय
पूजा को थाली को सजाना: प्रथम स्नेहा देसवाल एमए- इकोनॉमिक्स, द्वितीय पूजा बीए- तृतीय, तृतीय मोहित बीए- प्रथम, सांत्वना रिया बीए- प्रथम
बिना आग के खाना बनाना : प्रथम तनिषा बीए- तृतीय (इकोनॉमिक्स ऑनर्स) , द्वितीय पूजा बीए-3 , तृतीय मधु बीए- प्रथम, सांत्वना महक एमए- अंग्रेजी , सानिया बीए- प्रथम
रंगोली : प्रथम मोहित बीए- द्वितीय , द्वितीय पूजा बीए- तृतीय, तृतीय नीरू बीए-द्वितीय , साहिल बीए- तृतीय

Comments