Thursday, April 30, 2026
Newspaper and Magzine


पानीपत डिपो में धूल फांक रही करोड़ों की इलेक्ट्रिक बसें. सीए जगदीश धमीजा ने आरटीआई के जरिए 14 बिंदुओं पर मांगा कड़ा जवाब.

By LALIT SHARMA , in SOCIAL , at April 30, 2026 Tags: , , , ,

BOL PANIPAT : ​पानीपत शहर के लिए स्वीकृत 50 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में हो रही भारी लापरवाही और सरकारी खजाने को हो रहे संभावित नुकसान का मुद्दा सामने आया है। सीए जगदीश धमीजा ने राज्य परिवहन विभाग, हरियाणा रोडवेज (पानीपत) के जन सूचना अधिकारी को सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के तहत आवेदन देकर 14 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्पष्ट और प्रमाणित जानकारी मांगी है।

​आरटीआई में इस बात पर गहरी चिंता जताई गई है कि प्राप्त हुई बसों में से मात्र कुछ ही बसें रूटों पर चल रही हैं, जबकि कई बसें पिछले कई महीनों से डिपो में बिना संचालन (Non-operational) के खड़ी हैं। लंबे समय तक बिना संचालन के खड़े रहने के कारण इन बसों की महंगी लिथियम-आयन बैटरी (Lithium-ion Battery) और अन्य तकनीकी उपकरणों के खराब होने की प्रबल आशंका है, जो सीधे तौर पर सरकारी राजस्व का भारी नुकसान है।

​आरटीआई में उठाए गए प्रमुख सवाल और मुद्दे:
​बसों की स्थिति और खराबी का अंदेशा: विभाग से पूछा गया है कि अब तक कुल कितनी बसें प्राप्त हुई हैं, कितनी नियमित चल रही हैं और जो बसें महीनों से खड़ी हैं, उन्हें रूट पर न चलाने का मुख्य कारण क्या है?। यह भी पूछा गया है कि क्या बिना चले खड़ी बसों का कोई उपकरण या बैटरी अब तक खराब हो चुकी है और यदि हाँ, तो इसका खर्च कौन वहन करेगा (संबंधित निर्माता कंपनी या सरकारी विभाग)?।
​चार्जिंग स्टेशन व प्रशिक्षित स्टाफ की कमी: आरटीआई में सवाल उठाया गया है कि क्या इन 50 बसों को चार्ज करने के लिए पर्याप्त ‘चार्जिंग स्टेशन’ स्थापित किए गए हैं? यदि नहीं, तो बसों के आने से पहले इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार न करने के लिए कौन जिम्मेदार है?। इसके साथ ही, इन अत्याधुनिक बसों को चलाने के लिए पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित ड्राइवर और रखरखाव (Maintenance) के लिए तकनीकी स्टाफ/मैकेनिक की उपलब्धता पर भी जवाब मांगा गया है।
​वारंटी, एएमसी (AMC) और वित्तीय नुकसान: एक बड़ा सवाल यह है कि क्या डिपो में खड़ी बसों की वारंटी या रखरखाव अनुबंध (AMC) डिलीवरी के दिन से ही शुरू हो चुका है?। यदि हाँ, तो बसों के बिना चले ही वारंटी अवधि समाप्त होने से जो नुकसान हो रहा है, उसकी जिम्मेदारी किसकी है?। इसके अलावा, निजी कंपनी या ठेकेदार के साथ किए गए अनुबंध और बसों की खरीद या संचालन के एवज में किए जा रहे वित्तीय भुगतान (EMI/किराया) का ब्यौरा भी मांगा गया है।
​रूट, परमिट और शेष बसें: क्या बसों के लिए स्थानीय या अंतर-शहरी (Inter-city) रूट निर्धारित होकर परमिट जारी हुए हैं या नहीं?। साथ ही, शेष बची हुई बसें कब तक आएंगी और खड़ी बसों का सुचारू संचालन कब से शुरू होगा?।
​इस मामले की पारदर्शिता और सच्चाई जानने के लिए सीए धमीजा ने आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 2(j)(i) के तहत कड़ा रुख अपनाते हुए डिपो में खड़ी बसों की वर्तमान स्थिति, उनके रखरखाव के रजिस्टर और लॉगबुक का स्वयं भौतिक निरीक्षण (Physical Inspection) करने की मांग की है, जिसके लिए आगामी तिथि और समय आवंटित करने का अनुरोध किया गया है।

Comments


Leave a Reply