अक्तुबर समाजवादी क्रांति दिवस के अवसर पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया।
BOL PANIPAT : 7 नवम्बर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की पानीपत जिला कौंसिल की ओर से आज स्थानीय भगत सिंह स्मारक के प्रांगण में अक्तुबर समाजवादी क्रांति के पावन दिवस के अवसर पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता सीपीआई नेता शीश राम तोमर ने की और संचालन सीपीआई के जिला सचिव पवन कुमार सैनी एडवोकेट ने किया।
सीपीआई के राज्य सचिव दरियाव सिंह कश्यप ने सीपीआई का झंडारोहण करके गोष्ठी का शुभारंभ किया और अक्तुबर समाजवादी क्रांति के महानायक कामरेड व्लादिमिर इल्यिच लेनिन के चित्र पर माल्यार्पण किया।
विचार गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए दरियाव सिंह कश्यप ने कहा कि 7 नवम्बर 1917 ( रुसी कलैंडर के अनुसार 25 अक्तुबर) को कामरेड लेनिन के नेतृत्व में रुस में महान समाजवादी क्रांति सम्पन्न हुई। इस क्रांति के बाद रुस में पूंजीवादी व्यवस्था खत्म करके मजदूरों – किसानों का राज कायम हुआ। उन्होंने कहा कि रुस में महंगाई, बेरोजगारी, अशिक्षा जैसी बुराईयों को पूरी तरह समाप्त करके देश के नागरिकों को रोजगार, रोटी, कपड़ा, मकान ,शिक्षा और चिकित्सा जैसी मूलभूत जरूरतों को पूरा किया गया।
सीपीआई की राज्य कार्यकारिणी के सदस्य राम रतन एडवोकेट ने कहा कि रुस में हुई इस क्रांति ने वहां के मजदूरों, किसानों एवं मेहनतकश जनता की रहन – सहन की दशा सुधारने के साथ साथ दुनिया के विभिन्न देशों में चल रहे आजादी के आंदोलन को एक नई दिशा दी और आजाद हुए नये देशों को विकास के लिए भारी हार्थिक सहायता भी दी। उन्होंने कहा कि हमारे देश में सार्वजनिक क्षेत्र की स्थापना में सोवियत संघ की कम्युनिस्ट सरकार के सहयोग को भुलाया नही जा सकता। कामरेड राम रतन एडवोकेट ने कहा कि हमें समझना होगा कि आज की भाजपा सरकार सार्वजनिक क्षेत्र को निजी हाथों में बेच कर हमारे की आर्थिक आजादी को तहस नहस कर रही है। उन्होंने कहा कि हम आज इस महान दिवस के अवसर पर भाजपा सरकार को परास्त करने के लिए प्रचार प्रसार करने का संकल्प लेना चाहिए।
सीपीआई के जिला सचिव पवन कुमार सैनी एडवोकेट ने कहा कि रुस की समाजवादी क्रांति ने दुनिया में शांति बहाली की पहल की थी और दुनिया को विकास के रास्ते पर ले जाने का संदेश दिया था। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार इसराइल गाजा पट्टी सहित फिलिस्तीनी जनता पर बर्बर हमले कर रहा है उसकी जितनी निंदा की जाए कम है। उन्होंने गाजा पट्टी की घेराबंदी एवं युद्ध रोकने की मांग की। गोष्ठी में फिलिस्तीनी जनता के साथ एकजुटता व्यक्त की गई। गोष्ठी में रमाकांत, सन्नोवर राणा, जबेद, आसिफ, ओम प्रकाश, सतीश, चंद्रभान निम्बरी, सब्बु, भूपेन्द्र कश्यप, पवन कुमार, राम सिंह, नवल किशोर यादव, राम कैलाश यादव, इन्द्र सिंह दूहन आदि ने भाग लिया।

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