Thursday, August 20, 2026
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आर्य पीजी कॉलेज में मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण पर जागरूकता व्याख्यान का आयोजन

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at August 20, 2026 Tags: , , , ,

डॉ. सुनीता चाँद ने शिक्षकों को विद्यार्थियों में मानसिक तनाव एवं चिंता के संकेत पहचानने के लिए किया जागरूक

BOL PANIPAT , गुरुवार 20 अगस्त 2026, गुरुवार को आर्य पीजी कॉलेज में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाने और उन्हें मानसिक तनाव एवं अन्य समस्याओं से बचाने के उद्देश्य से “मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण” विषय पर जागरूकता व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षक एवं गैर-शिक्षक वर्ग ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को विद्यार्थियों में मानसिक तनाव, चिंता तथा अन्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के शुरुआती संकेतों की पहचान के प्रति जागरूक करना रहा।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. सुनीता चाँद, एसोसिएट प्रोफेसर, देशबंधु गुप्ता राजकीय महाविद्यालय, पानीपत रहीं। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता एवं उपचार्या डॉ. अनुराधा सिंह ने पौधा भेंटकर मुख्य वक्ता का स्वागत किया।

इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि विद्यार्थियों का मानसिक स्वास्थ्य उनके व्यक्तित्व एवं शैक्षणिक विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल शिक्षा प्रदान करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विद्यार्थियों को भावनात्मक रूप से मजबूत बनाने और कठिन परिस्थितियों में उनका मार्गदर्शन करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में विद्यार्थियों के लिए सकारात्मक, सुरक्षित एवं सहयोगात्मक वातावरण उपलब्ध करवाना प्राथमिकता है।

उपचार्या डॉ. अनुराधा सिंह ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में विद्यार्थियों पर पढ़ाई और भविष्य को लेकर विभिन्न प्रकार का दबाव रहता है। ऐसे में शिक्षकों का संवेदनशील रवैया विद्यार्थियों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने में सहायक हो सकता है। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान और उचित मार्गदर्शन से गंभीर परिस्थितियों को टाला जा सकता है।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. सुनीता चाँद ने अपने व्याख्यान में कहा कि विद्यार्थी अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय महाविद्यालय में बिताते हैं और शिक्षक उनके व्यवहार में होने वाले बदलावों को सबसे पहले महसूस कर सकते हैं। उन्होंने तनाव एवं चिंता के कारणों, लक्षणों, बचाव तथा उपचारात्मक उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के व्यवहार में अचानक बदलाव, पढ़ाई में रुचि कम होना, चुपचाप या अलग-थलग रहना तथा लगातार तनाव में दिखाई देना जैसे संकेतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

उन्होंने विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से शिक्षकों को यह भी समझाया कि वे विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं समग्र कल्याण में सकारात्मक भूमिका कैसे निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की समस्याओं को समझते समय शिक्षकों को सहानुभूति एवं संवेदनशीलता के साथ उनका मार्गदर्शन करना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर अभिभावकों को जानकारी देकर विशेषज्ञ चिकित्सकीय सहायता लेने के लिए भी प्रेरित किया जाना चाहिए।

इस अवसर पर डॉ. मीनाक्षी चौधरी, डॉ. शिखा गर्ग, डॉ. सुदेश रानी, डॉ. सोनिया सोनी, डॉ. आस्था गुप्ता, डॉ. मनीषा डुडेजा, मानवी सहित महाविद्यालय के सभी स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।

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