एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में वूमेन सेल के बैनर तले करवाचौथ का त्यौहार रंगारंग और पारंपरिक तरीके से मनाया गया
–मेगा मेहँदी प्रतियोगिता में प्रिया ने बाजी मार जीता नकद पुरस्कार
–करवाचौथ का त्यौहार पारिवारिक एवं सामाजिक दायित्वों और रिश्तों को मजबूत करता है: डॉ अनुपम अरोड़ा
BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में करवाचौथ का त्यौहार पूरे धूमधाम और परंपरागत तरीके से मनाया गया I कार्यक्रम में आकर्षण का केंद्र मेगा ‘मेहँदी लगाओ प्रतियोगिता’ का आयोजन रहा जिसमे लगभग 50 छात्राओं ने भाग लिया I नई पहल के तौर पर इस बार कार्यक्रम का शुभारंभ बीए प्रथम वर्ष की छात्राओं ने किया I छात्राओं का उत्साहवर्धन एवं मार्गदर्शन प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा और वूमेन सेल की प्राध्यापिकाओं ने किया I मेहँदी प्रतियोगिता का शीर्षक ‘मेहँदी लगाओ, धरती बचाओ’ रहा जिसमे प्रिया (बीए प्रथम) ने पहला, सान्या (बीए प्रथम) ने दूसरा और वंदना ने तीसरा स्थान हासिल कर नकद पुरस्कार जीता I निर्णायक मंडल की भूमिका डॉ प्रियंका चांदना और प्रो प्रवीण कुमारी ने निभाई I उनके साथ डॉ मोनिका खुराना, डॉ संतोष कुमारी, डॉ सुशीला बेनीवाल, डॉ दीपा वर्मा , डॉ प्रोमिला, डॉ बिंदु और प्रो सविता कुमारी आदि मौजूद रहे और उन्होनें अपने हाथों पर मेहँदी भी लगवाई I विदित रहे कि भारत वैसे भी त्योहारों और विविध आस्थाओं का देश है तथा यहाँ मनाया जाने वाला हर पर्व अनोखा एवं आकर्षक है I उत्तर भारत में मनाए जाने वाले करवा चौथ के पर्व का यहाँ के लोगो के दिलों में ख़ास स्थान है I हिन्दू सनातन पद्धति में करवा चौथ सुहागनो का महत्वपूर्ण त्यौहार माना गया है I यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है जिसे सुहागन स्त्रियाँ बड़ी श्रद्धा के साथ मनाती हैं I
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि ‘मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये कर्क चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये’ का भाव लिए करवाचौथ पारिवारिक एवं सामाजिक दायित्वों और रिश्तों को मजबूत करने वाला त्यौहार है I कॉलेज की छात्राओं एवं प्राध्यापिकाओं को पहले से इस भावनात्मक त्यौहार के प्रति जागरूक करना ही इस प्रकार के आयोजनों को मनाने का ध्येय है I कामयाबी के साथ जीवन में खुशियाँ और शान्ति मिले ऐसी मंगल कामना कॉलेज करता है I उन्होनें कहा कि चूँकि करवाचौथ एक पारम्परिक पर्व है इसलिए इस मौके पर मेहँदी की प्रतियोगिता का आयोजन करना प्रासंगिक है और इसका भी एक अपना ही चाव है I
डॉ मोनिका खुराना ने कहा कि हर सुहागन स्त्री के लिए करवाचौथ का व्रत काफी महत्वपूर्ण होता है I प्यार और आस्था के इस पर्व पर सुहागन स्त्रियां पूरा दिन उपवास रखकर भगवान से अपने पति की लंबी उम्र और गृहस्थ जीवन में सुख की कामना करती है I उन्होनें कहा कि ‘करवाचौथ’ दो शब्दों से मिलकर बना है ‘करवा’ यानी ‘मिट्टी का बरतन और ‘चौथ’ यानि ‘चतुर्थी I इस त्योहार पर मिट्टी के बरतन यानी करवे का विशेष महत्व है और यह माना जाता है कि करवाचौथ की कथा सुनने से विवाहित महिलाओं का सुहाग बना रहता है एवं उनके घर में सुख, शान्ति और समृद्धि बनी रहती है I
डॉ संतोष कुमारी ने कहा कि सुहागन या पत्नियों के लिए करवाचौथ बहुत ही महत्वपूर्ण होता है I इस पर्व पर महिलाएं हाथ में मेहँदी रचाकर और सोलह श्रृंगार कर अपने पति की पूजा कर उनके लिए व्रत रखती है I सुहागन महिलाये इस व्रत को पति की दीर्घायु के लिए रखती है I यह व्रत अलग-अलग प्रदेशों में वहां पर व्याप्त मान्यताओं के अनुरूप रखा जाता है I इन मान्यताओं में थोडा बहुत अंतर तो हो सकता है परंतु सभी का सार और भाव एक ही होता है I उन्होनें इसे माताओ, बहनों, बेटियों और पत्नियों के लिए सबसे बड़ा त्यौहार बताया और ह्रदय से सदभावनाए संप्रेषित की I
रंग-बिरंगी और विविध डिज़ाइन वाली मेहँदी प्रतियोगिता के परिणाम इस प्रकार रहे-
प्रथम प्रिया बीए- प्रथम
द्वितीय सान्या बीए- प्रथम
तृतीय वंदना

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