एसडीपीजी कॉलेज पानीपत में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन
- रमन इफेक्ट की खोज करने वाले एकमात्र भारतीय नागरिक वैज्ञानिक नोबेल पुरस्कार विजेता सीवी रमन को किया गया याद
- वैज्ञानिक अनुसंधान में धैर्य और निरंतरता नई खोजों एवं अविष्कारों का आधार है:डॉ श्याम कुमार
- भारत को स्वदेशी विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में और ध्यान देने की आवश्यकता: प्रो संजीव अग्रवाल
- वैज्ञानिक सोच से राष्ट्र, अन्तर्राष्ट्र और मानवता की सभी समस्याओं का समाधान है: डॉ अनुपम अरोड़ा
- कार्यक्रम में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद को पुण्यतिथि पर दी गई भावभीनी श्रधान्जली
- क्विज प्रतियोगिता और साइंसडेकलेमेशन कांटेस्ट का हुआ आयोजन
BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज के विज्ञान संकाय ने भारतीय भौतिक वैज्ञानिक और नोबेल पुरस्कार विजेता सर चन्द्रशेखर वेंकट रमन के रमन प्रभाव के आविष्कार को याद करने और वैज्ञानिक सोच से मानवता को बचाने हेतू विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिसमे कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र के पूर्व डीन अकादमीक एवं भौतिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ श्याम कुमार और कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र स्थित उत्तर भारत के सबसे बड़े आयन-बीम रिसर्च सेंटर के इंचार्ज प्रो संजीव अग्रवाल ने अपने व्याख्यानो से विद्यार्थियों के ज्ञान में वृद्दि की. डॉ श्याम कुमार और डॉ संजीव अग्रवाल एमएससी (भौतिकी), एमएससी (रसायन शास्त्र) एवं बीएससी के छात्र-छात्राओं से रुबरु हुए और उनसे उनके पाठ्यक्रम और भविष्य की योजनाओं के बारे में भी चर्चा की. विदित रहे की वर्ष 1928 में भारतीय भौतिक विज्ञानी सर चन्द्रशेखर वेंकटरमन के द्वारा रमन प्रभाव के आविष्कार को याद करने के लिये हर वर्ष 28 फरवरी को बड़े उत्साह के साथ पूरे भारतवर्ष में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है जिसमे इस वर्ष का थीम ‘सततभविष्य के लिएविज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मेंएकीकृत दृष्टिकोण’ है.रमन प्रभाव का सम्बन्ध प्रकाश के प्रकीर्ण से है. विज्ञान के क्षेत्र में इतनी बड़ीसफलता हासिल करने के लिये भौतिक विज्ञान में चन्द्रशेखर वेंकट रमन को नोबल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया.
डॉ श्याम कुमार पूर्व डीन अकादमीक एवं भौतिकी विभाग विभागाध्यक्ष नेकहा की आज के समय में लोगों के जीवन में विज्ञान का महत्व इतना बढ़ चुका है कि बिना विज्ञान के मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है. परन्तुजहां विज्ञान एक तरफ मानव जीवन के लिए वरदान है वही दूसरी तरफ विज्ञान का गलत उपयोग इसे विध्वंसकारी भी बना रहाहै और इसका ताजा उदाहरण वर्तमान में जारी रूस और युक्रेन का युद्ध है जिसने पूरी दुनिया और सम्पूर्णमानव जाती को परमाणु युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है.महान वैज्ञानिक रमण को याद करते हुए उन्होनें कहा कहा कि 28 फरवरी 1928 भारत के लिए एक महान दिन था जब प्रसिद्ध भारतीय भौतिक शास्त्री चन्द्रशेखर वेंकट रमन के द्वारा भारतीय विज्ञान के क्षेत्र में आविष्कार हुआ जिसे बाद में रमन इफ़ेक्ट के नाम से जाना गया.रमन विज्ञान के क्षेत्र के पहले ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने भारत में ऐसे आविष्कार पर शोध किया था. भविष्य में इस कार्यक्रम को हमेशा याद और सम्मान देने के लिये वर्ष 1986में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकीय संचार की राष्ट्रीय परिषद द्वारा भारत में 28फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रुप में नामित करने के लिये भारतीय सरकार से कहा गया.इसे हर वर्ष विद्यार्थी,शिक्षक,संस्थानऔर शोधकर्ताओं द्वारा स्कूल,कॉलेज,विश्वविद्यालय,भारत के तकनीकी और शोध संस्थान,चिकित्सा,अकादमिक,वैज्ञानिक सहित सभी शिक्षण संस्थान उत्साह के साथ मनाते हैं जिसमे विज्ञान के विभिन्नआयामों और उपलब्धियों को याद किया जाता है. राष्ट्रीय और राज्य विज्ञान संस्थान इस दिन अपने नवीतम शोध भी प्रदर्शित करते हैं. विज्ञान दिवस के अवसर पर विद्यार्थीयो के लिए इस प्रकार के कार्यकर्मोंको आयोजित करने का अद्देश्य उनमे विज्ञान के प्रति लगाव को पैदा करना और वैज्ञानिक सोच और शोधको बढ़ावा देना है. राष्ट्र के आम नागरिकों को भी विज्ञान का संदेश तभी पहुँच पाएगा. अपने वक्तव्य में डॉ श्याम कुमार ने सर सीवी रमन के जीवन, उनकी शिक्षा-दीक्षा, खोजों और उपलब्धियों के बारे उपस्थित छात्र-छात्राओं को बताया. उन्होनें कहाकी प्रकाश के प्रकीर्णन और रमन प्रभाव की खोज के लिए नोबेल पुरस्कार पाने वाले भौतिक वैज्ञानिक सर सीवी रमन आधुनिक भारत के एक महान वैज्ञानिक थे.रमन आधुनिक युग के पहले ऐसे भारतीय वैज्ञानिक थे जिन्होंने विज्ञान के संसार में भारत को बहुत ख्याति दिलाई. भारत सरकार ने विज्ञान के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के कारण उन्हें देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्नदिया है. साथ ही संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी उन्हें प्रतिष्ठित ‘लेनिन शांति पुरस्कार’ से सम्मानित किया है. भारत में विज्ञान को नई ऊंचाइयां प्रदान तथा स्वाधीन भारत में विज्ञान के अध्ययन और शोध को जबरदस्त प्रोत्साहन देने का श्रेय सर रमन को ही जाता है. विज्ञान और अंग्रेज़ी साहित्य के साथ-साथ संगीत में भी उनकी गहरी रूचि थी और यही आगे चलकर उनकी वैज्ञानिक खोजों का कारण बना. भौतिक में एमए के दौरान वे कक्षा में कम और कॉलेज की प्रयोगशाला में ही अपने प्रयोग और खोजें करने में व्यस्त रहते. उनके अध्यापक उनकी प्रतिभा को भली-भांति समझते थे और इसीलिए प्रोफ़ेसर आरएल जॉन्स ने उन्हें अपने शोध और प्रयोगों के परिणामों को लन्दन से प्रकाशित होने वाली ‘फ़िलॉसफ़िकल पत्रिका’ को भेजने की सलाह दी जहाँ यह 1906में प्रकाशित हुआ.
डॉ संजीव अग्रवाल पूर्व विभागाध्यक्ष भौतिकी विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविधालय ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी में एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने को कहा औरकहा कि प्रकृति जितना हमें देती हैहमें उसका सदुपयोग करना चाहिए.भारत के विकास में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की अहम भूमिका रही है तथा विज्ञान के क्षेत्र को सदा प्राथमिकता दी गयी है. रमन इफेक्ट का इस्तेमाल आज भी कई जगहों पर हो रहा है. जब भारत के चंद्रयान-1 ने चांद पर पानी होने का ऐलान किया थातो इसके पीछे भी रमन इफेक्ट का ही कमाल था. फोरेंसिक साइंस में भी रमन इफेक्ट काफी उपयोगी साबित हो रहा है और इसकी मदद से अब यह पता लगाना आसान हो गया है कि कौन-सी घटना कब और कैसे हुई थी.

प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा की विज्ञान का उपयोग स्थिरता, सुरक्षा और सृजनता के लिए होना चाहिए. हथियाओं के जखीरों ने आज सम्पूर्ण मानव जाती के अस्तित्व को ही खतरे में ला दिया है. विध्वंश और युद्धों की विभीषिका के परिणाम सदियों तक झेलने पड़ते है. मानव कल्याण और सकारात्मक सृजन ही विज्ञान का मूल उदेश्य होना चाहिए. अबहमें मानवता से भरपूर वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं की सबसे अधिक जरुरत है.स्टिल की स्पेक्ट्रम प्रकृति, स्टिल डाइनेमिक्स के बुनियादी मुद्दे,हीरे की संरचना और गुणों एवंअनेक रंगदीप्त पदार्थो के प्रकाशीय आचरण पर सीवी रमण का किया शोध आज भी मूल्यवान है. उन्होंने ही पहली बार तबले और मृदंगम के संनादी (हार्मोनिक) की प्रकृति की खोज की थी. अनेक पुरस्कारों से सम्मानित सर रमन हर विद्यार्थी के आदर्श है. कड़ी मेहनत और वैज्ञानिकसोच का कोई विकल्प नहीं है और यदि हम वाकई ऐसी सोच खुद में विकसित कर ले तो बुलंदियां हमारे कदमचूमेंगी. विज्ञान दिवस के अवसर पर विद्यार्थीयो के लिए इस प्रकार के सेमीनार औरप्रतियोगिताओंको आयोजित करने का उद्देश्यउनमे विज्ञान के प्रति लगाव को पैदा करना और वैज्ञानिक सोच एवंशोध को बढ़ावा देना है.राष्ट्र के आम नागरिकों तकविज्ञान का संदेशभीतभी पहुँच पाएगा.वैज्ञानिक सोच के बढ़ने से ही हम एक जिम्मेदार और जागरूक नागरिक तथा वैज्ञानिक बन सकते है.
डॉ चेतना नरूला नेदेश के प्रथम राष्ट्रपति एवं स्वतंत्रता सेनानी राजेन्द्र प्रसाद को याद करते हुए कहा की भारत रत्न से सम्मानित डॉ प्रसाद प्रसाद 26 फरवरी 1950 से 1962 तक देश के राष्ट्रपति रहे.मंजिल को पाने की दिशा में आगे बढ़ते हुए याद रहे कि मंजिल की ओर बढ़ता रास्ता भी उतना ही नेक हो और किसी की गलत मंशाएं आपको किनारे नहीं लगा सकतीं जैसे विचारों से औत-प्रौतडॉ राजेन्द्र प्रसाद हम सभी के लिए आदर्श है.असाधारण प्रतिभा, स्वभाव का अनोखा माधुर्य, चरित्र की विशालता और अति त्याग के गुणों ने डॉराजेन्द्र प्रसाद को हम सभी का प्रिय नेता बना दिया है. उनके जीवन की कहानी श्रेष्ठ भारतीय मूल्यों और आदर्शों की कहानी है.

आज आयोजित विज्ञान क्विज प्रतियोगिता में एमएससी के छात्र अमन ने बाजी मारी और प्रथम स्थान पाया. दूसरा स्थान दीक्षा रानी और तीसरा स्थान कोमल ने हासिल किया. पेपर रीडिंग कांटेस्ट में एमएससी के छात्र अतुल ने प्रथम, तरुणा ने दूसरा और आकांक्षा ने तीसरा स्थान पाया. इस अवसर पर विज्ञान संकाय सेप्रो राकेश सिंगला, डॉ मुकेश गुप्ता, डॉ प्रवीन कत्याल, डॉ रवि कुमार, डॉ राहुल जैन, डॉ प्रियंका चांदना, डॉ चेतना नरूला, डॉ रेणु,डॉ बिंदु, प्रो जगबीर, प्रो दिव्या ने कार्यक्रमों में हिस्सा लिया.

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