Thursday, April 23, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में विश्व पुस्तक दिवस आदर भाव के साथ मनाया गया

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at April 23, 2026 Tags: , , , , ,

शेक्सपियर के जन्मदिवस पर विद्यार्थियों ने दमदार अभिनय के साथ किया शेक्सपियर के दो नाटकों का मंचन

पुस्तकें हमारी सबसे अच्छी साथी हैं जो ज्ञान के दीप को प्रज्वलित रखती हैं: दिनेश गोयल

BOL PANIPAT , 23 अप्रैल, एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में विश्व पुस्तक दिवस और शेक्सपियर के जन्मदिवस को आदर और सम्मान भाव के साथ मनाया गया । इस अवसर पर एमए अंग्रेजी और अंग्रेजी आनर्स के छात्र-छात्राओं ने दमदार अभिनय के साथ शेक्सपियर के दो नाटकों का जानदार मंचन किया । ‘किंग लीयर’ और ‘द मर्चेंट ऑफ़ वेनिस’ नाटकों को विद्यार्थियों ने रंग-बिरंगी पोशाक पहन शानदार प्रस्तुति देकर दर्शकों को अभिभूत कर दिया । नाटकों के मंचन का उदघाटन कॉलेज प्रधान दिनेश गोयल और प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने किया । उनके साथ अंग्रेजी विभाग से प्रो अन्नू आहूजा, डॉ संतोष कुमारी, डॉ एसके वर्मा, डॉ मोनिका खुराना, डॉ वीरेंद्र गिल, प्रो डेनसन डी पॉल, प्रो मणि, प्रो मानसी आदि ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन और हौंसला अफजाई की । विदित रहे कि विलियम शेक्सपियर एक प्रसिद्ध अंग्रेजी नाटककार, कवि और अभिनेता थे, जिन्हें व्यापक रूप से अंग्रेजी भाषा का सबसे महान लेखक और दुनिया का प्रमुख नाटककार माना जाता है । उन्हें ‘बार्ड ऑफ एवन’ के नाम से भी जाना जाता है । उन्होंने लगभग 39 नाटक, 154 सॉनेट और कई कविताएं लिखीं । सभी कलाकारों को शील्ड से सम्मानित किया गया ।  

दिनेश गोयल ने कहा कि विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस  का मुख्य उद्देश्य पठन-पाठन, प्रकाशन और कॉपीराइट के माध्यम से बौद्धिक संपदा को बढ़ावा देना है । यह दिन किताबों की शक्ति, संस्कृति, साक्षरता और लेखकों के योगदान का सम्मान करता है । यह डिजिटल युग में भी पढ़ने की आदत को प्रोत्साहित करने और ज्ञान साझा करने का एक वैश्विक उत्सव है । यह दिवस विशेष रूप से बच्चों और युवाओं को स्क्रीन से हटाकर किताबों की दुनिया से जोड़ने का प्रयास करता है, जिससे उनकी रचनात्मकता और आलोचनात्मक सोच में सुधार हो ।

डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि विद्यार्थियों द्वारा पेश किया गया नाटकीय चित्रण बहुत भावपूर्ण और प्रभावी रहा । उन्होनें दोनों ही नाटकों की  कहानी भावुक अभिनय के माध्यम से दर्शकों के सामने पेश की । शेक्सपियर के बारे में बोलते हुए उन्होनें कहा कि उनके पात्र इतने वास्तविक और जटिल हैं कि पाठक उनसे जुड़ जाते हैं । उनकी रचनाएं सिर्फ इंग्लैंड नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में बहुत सी भाषाओं में अनुवादित और लोकप्रिय हैं । विश्व पुस्तक दिवस पर बोलते हुए उन्होनें कहा कि पुस्तकें पीढ़ियों और संस्कृतियों के बीच एक पुल का काम करती हैं, जो हमें अतीत, वर्तमान और भविष्य से जोड़ती हैं । पुस्तकें न केवल जानकारी प्रदान करती हैं, बल्कि धैर्य, सहानुभूति और जीवन को देखने का नया नजरिया भी सिखाती हैं ।

डॉ संतोष कुमारी ने ‘किंग लियर’ कि कहानी दर्शकों को बताई और कहा कि बूढ़ा राजा लियर अपना राज्य तीन बेटियों में बाँटना चाहता है और पूछता है कि कौन उससे सबसे ज्यादा प्यार करती है । बड़ी बेटियाँ गोनरिल और रीगन झूठी चापलूसी करती हैं, पर सबसे छोटी और सच्ची बेटी कॉर्डेलिया चुप रहती है, जिससे नाराज़ लियर उसे बेदखल कर देता है । लियर अपना सब कुछ बड़ी बेटियों को दे देता है, पर वे उसे घर से निकाल देती हैं और वह तूफान में पागल होकर भटकता है । इधर कॉर्डेलिया फ्रांस की रानी बनकर पिता को बचाने आती है, लेकिन जंग में दोनों पकड़े जाते हैं और कॉर्डेलिया को मार दिया जाता है । बेटी की लाश गोद में लिए लियर का दिल टूट जाता है और उसकी मौत हो जाती है, सत्ता और अहंकार की कीमत सब चुकाते हैं ।

प्रो अन्नू आहूजा ने कहा कि वेनिस का व्यापारी एंटोनियो अपने दोस्त बैसनियो की मदद के लिए यहूदी सूदखोर शायलॉक से तीन हजार डुकट उधार लेता है, शर्त है कि न चुका पाने पर शायलॉक उसके शरीर से एक पाउंड मांस काट लेगा ।  बैसनियो उस पैसे से बेलमॉन्ट जाकर अमीर वारिस पोर्शिया से शादी कर लेता है, पर एंटोनियो के जहाज डूबने की खबर आती है और वह कर्ज नहीं चुका पाता ।  शायलॉक कोर्ट में अपना ‘पाउंड ऑफ फ्लेश’ मांगता है, क्योंकि उसकी बेटी जेसिका भी एंटोनियो के दोस्त के साथ भाग गई थी । पोर्शिया वकील का भेष बदलकर कोर्ट आती है और कहती है कि शायलॉक मांस ले सकता है पर एक बूँद खून नहीं बहना चाहिए, जो असंभव है ।  इस तरह एंटोनियो बच जाता है, शायलॉक की आधी संपत्ति जब्त कर उसे ईसाई बनने की सज़ा मिलती है, और अंत में सबका मिलन होता है ।

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