एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में यूथ रेड क्रॉस और एनएसएस कार्यकर्ताओं ने मनाया नेशनल डीवोर्मींग डे
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, स्वास्थ्य विभाग हरियाणा के सहयोग से1000 छात्र-छात्राओं को खिलाई गई डीवोर्मींग टेबलेट
रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और झुग्गी-झोपड़ीकेबच्चो को भी कियाइस अभियान में शामिल
साफ़ एवं स्वच्छ पानी और भोजन हमें हर प्रकार की पेट की बिमारी से बचाता है: डॉ अनुपम अरोड़ा
BOL PANIPAT , 10 फरवरी.
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में नेशनल डीवोर्मींग डे (राष्ट्रीय कृमी दिवस) के अवसर पर कॉलेज यूथ रेड क्रॉस, एनएसएस यूनिट्स और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, स्वास्थ्य विभाग हरियाणा के सहयोग से लगभग 1000 छात्र एवं छात्राओं को डीवोर्मींग की टेबलेट खिलाई गई. कॉलेज वाईआरसी और एनएसएस यूनिट के तत्वाधान में आयोजित इस कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं ने रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और झुग्गी-झोपडीयो में जा कर वहां पर रह रहे बच्चों को भी यह टेबलेट वितरित की. कार्यक्रम का विधिवत आरम्भ कॉलेज प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने बच्चो विशेषकर छात्राओं को प्रेरित करने हेतू स्वयं एक टेबलेट खा कर किया. इस अवसर पर कॉलेज में वाईआरसी नोडल अधिकारी डॉ राकेश गर्ग, एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर डॉ संतोष कुमारी, डॉ एसके वर्मा, दीपक मित्तल उपस्थित रहे जिन्होनें छात्र-छात्राओं को डीवोर्मींग के फायदों के बारे में विस्तार से बताया और उनके मन में व्याप्त शंकाओं का निवारण किया.केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा चलाये गए इस अभियान का उद्देश्य देश के भावी नागरिकों को शारीरिक रूप से और अधिक तंदुरस्त करना और सेहतमंद बनाना है. वे बीमारियों से दूर रहे इसी उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष एल्बेनडाजोल की टेबलेट मुफ्त वितरित की जाती है. प्राचार्य ने बताया कि जो छात्र-छात्राएं इस दवाई से छूट भी जाएँ तोवह 17 फरवरी को मॉप-अप दिवस के दिन अपने निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर इस दवाई को प्राप्त कर खा सकते है.
डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि पेट में कीड़े हो जायें तो यह बहुत ही कष्टदायी होता है. यह समस्याइ सबसे अधिक बच्चों में होती है परन्तु इसका अर्थ यह नहीं है कि बड़ों की आंतों में कीड़े नहीं हो सकते हैं.पेट के कीड़े लगभग 20 प्रकार के होते हैं जो हमारी अंतड़ियों में घाव पैदा कर सकते हैं. इसके कारण रोगी को बेचैनी, पेट में गैस बनना, दिल की धड़कन असामान्य होना, बदहजमी, पेट में दर्द,बुखार जैसी कई प्रकार की समस्या हो जाती है. रोगी की न सिर्फ खाने में रुचि कम हो जाती है बल्कि उसे चक्कर भी आने शुरू हो सकते हैं.मुख्यतः गंदगी के कारण ही पेट में कीड़े होते हैं. अशुद्ध और खुला भोजन करने वालों को भी यह समस्या अधिक होती है. केवल डीवोर्मींग से ही इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है. उन्होनें सभी से अनुरोध किया वे अपनी जीवन शैली को बदले और घर पर बने भोजन को ही खाए. इसी में हमारा स्वास्थ्य सुरक्षित है.साफ़ एवं स्वच्छ पानी और भोजन हमें हर प्रकार की पेट की बीमारी से बचाता है.
डॉ राकेश गर्ग वाईआरसी नोडल अधिकारी ने कहा कि वर्तमान में हर व्यक्ति अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए मेहनत करता है जिसके लिए कई बार उसे अपने घर से दूर भी रहना पड़ता है. घर से दूर रहने के कारण उन्हें खाने-पीने की समस्या से जूझना पड़ता है और बाहर का भोजनखाना उनकी मजबूरी हो जाती है. ऐसे में इस बात की आशंकाएं बढ़ जाती है किउस खाने को बनाने में साफ़-सफाई का ध्यान न रखा गया हो.इसी कारण उनके पेट में कीड़े होने शुरू हो जाते है और यदि इस समस्या का समय रहते इलाज न किया जाए तो यह समस्या बड़ी होकर उभरती है.
डॉ एसके वर्मा ने कहा कि इस समस्या से ज्यादातर छोटे बच्चे पीड़ित रहते है क्यूंकि वे बाहर का खाना अधिक पसंद करते है. फ़ास्ट फ़ूड खाने में स्वादिष्ट और दिखने में आकर्षक तो होते है लेकिन इनका दुष्प्रभाव हमारे पेट को झेलना पड़ता है. इस बाहर मिलने वाले खाने को पूरी साफ़ सफाई से नहीं बनाया जाता जिस कारण इसमें में दूषित कण और बैक्टीरिया इत्यादि पनप जाते है और जोसीधे हमारे पेट में आकर कीड़ो का रूप ले लेते है. फिर बच्चो का प्रतिरक्षा तंत्र भी थोडा कमजोर होता है जिस कारण वो छोटी से छोटी बिमारी से भी लड़ नहीं पाते और अंत में बीमार हो जातेहै.सही समय पर की गई डीवोर्मींग ही इसका एक मात्र हल और निदान है.

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