नागरिकों को बेहतर, पारदर्शी और सरल सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन का मुख्य उद्देश्य: उपायुक्त डॉ विरेंदर कुमार दहिया
पीपीपी शिकायतों के त्वरित समाधान को प्रशासन की नई पहल
समाधान शिविरों में आने वाली हर शिकायत की होगी नियमित मॉनिटरिंग
नागरिकों को बिना परेशानी योजनाओं का लाभ दिलाना सरकार की प्राथमिकता
अतिरिक्त उपायुक्त बने जिला नोडल अधिकारी
BOL PANIPAT , 12 मई। परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) से संबंधित समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी समाधान के लिए जिला प्रशासन ने नई व्यवस्था लागू की है। सीपीएस श्री अरुण गुप्ता के निर्देशों पर जिला उपायुक्त डॉ विरेंदर कुमार दहिया ने अतिरिक्त उपायुक्त अंकित चौकसे को पीपीपी शिकायतों के समाधान हेतु जिला नोडल अधिकारी नियुक्त किया है।
उपायुक्त डॉ विरेंदर कुमार दहिया ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है कि नागरिकों को सरकारी सेवाओं एवं जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी परेशानी के समयबद्ध तरीके से मिले। उपायुक्त डॉ दहिया ने बताया कि समाधान शिविरों में बड़ी संख्या में नागरिक पीपीपी से जुड़ी विभिन्न समस्याएं लेकर पहुंच रहे हैं, जिनके शीघ्र समाधान के लिए यह विशेष कदम उठाया गया है।
डॉ दहिया ने बताया कि अतिरिक्त उपायुक्त, पीपीपी स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. सतीश खोला के साथ समन्वय स्थापित कर शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया को तेज करेंगे। पीपीपी में नाम, जन्म तिथि, परिवार विवरण, आय, मोबाइल नंबर, आधार लिंकिंग तथा अन्य तकनीकी त्रुटियों से संबंधित शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निपटारा किया जाएगा।
उपायुक्त डॉ दहिया ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य नागरिकों को बेहतर, पारदर्शी और सरल सेवाएं उपलब्ध कराना है ताकि लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। समाधान शिविरों में प्राप्त प्रत्येक शिकायत का पंजीकरण किया जाएगा और उसकी नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही संबंधित विभागों के अधिकारियों को समयबद्ध समाधान के निर्देश दिए गए हैं।
उपायुक्त ने कहा कि परिवार पहचान पत्र प्रणाली के माध्यम से सरकार विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र नागरिकों तक पहुंचा रही है। ऐसे में पीपीपी से जुड़ी समस्याओं का त्वरित समाधान अत्यंत आवश्यक है। प्रशासन पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए कार्य कर रहा है। जिला उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि समाधान शिविरों में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की समस्या को प्राथमिकता के आधार पर सुनते हुए उसका शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके।

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